पुण्यतिथि विशेष: भारत के पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे मोरारजी देसाई, 81 वर्ष की उम्र में संभाला था पद

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चैतन्य भारत न्यूज

स्वतंत्रता सेनानी और आजाद भारत के चौथे प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने आज ही के दिन साल 1995 में दुनिया को अलविदा कह दिया था। मोरारजी देसाई 81 वर्ष की उम्र में देश के प्रधानमंत्री बने। उन्होंने 1977 से 1979 तक देश के मुखिया का पद संभाला। मोरारजी देसाई देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अलावा अन्य दल से थे। आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें-

  • मोरारजी देसाई का जन्म 29 फरवरी 1896 को गुजरात के भदेली गांव में हुआ था।
  • उनके पिता एक स्कूल शिक्षक थे। मोरारजी ने बचपन से ही अपने पिता से कड़ी मेहनत और सच्चाई के मूल्यों को सीखा।
  • उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा सेंट बुसर हाई स्कूल से की। यहां से उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की। फिर साल 1918 में तत्कालीन बॉम्बे प्रांत के विल्सन सिविल सर्विस से उन्होंने ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने 12 सालों तक डिप्टी कलेक्टर के रूप में काम किया।
  • साल 1930 के समय जब भारत महात्मा गांधी द्वारा शुरू किए गए स्वतंत्रता संग्राम बीच में था, उस समय देसाई ने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत बिगुल फूंक दिया।
  • देसाई ने डिप्टी कलेक्टर के पद से इस्तीफा देकर आजादी के संघर्ष में उतरने का फैसला किया। उन्होंने स्वतंत्रता के संघर्ष के दौरान लगभग 10 साल जेल में बिताए।
  • साल 1952 में देसाई को बंबई का मुख्यमंत्री बनाया गया। तब वे गुजरात और महाराष्ट्र बंबई प्रोविंस के नाम से मशहूर थे। लेकिन बाद में उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपने कदम बढ़ाने शुरू किए।
  • देसाई को पहले तो नेहरू मंत्रिमंडल में जगह मिली और बाद में उन्हें इंदिरा गांधी की सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
  • साल 1956 में देसाई को भारत सरकार में वाणिज्य और उद्योग मंत्री बनाया गया था। उन्होंने इस पद पर 1963 तक काम किया।
  • 1967 में इंदिरा गांधी ने उप प्रधानमंत्री बनाया। फिर 1969 में उन्होंने इंदिरा और कांग्रेस पार्टी के खिलाफ जाकर इस्तीफा दे दिया।
  • साल 1975 में देश आपातकाल लगने के बाद राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने के चलते देसाई को गिरफ्तार भी किया गया था। इसके बाद वह कई दलों को शामिल कर बनाए गए गठबंधन जनता पार्टी में सक्रिय हो गए।
  • साल 1977 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने करीब 19 महीने के आपातकाल के बाद फिर से चुनाव कराने की घोषणा की। तब जनता ने इंदिरा गांधी को सत्ता दें बाहर कर दिया और जनता पार्टी पर भरोसा जताया।
  • फिर जनता पार्टी के नेताओं ने प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के रूप में देसाई को चुना।
  • दो साल बाद जनता पार्टी के गठबंधन की दरारें पड़ने लगी। इसके बाद संसद में अविश्वास प्रस्ताव से बचने के लिए देसाई ने 15 जुलाई 1979 को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे दे दिया।
  • अपने जीवन में कई उतार-चढ़ाव से गुजरने के बाद मोरारजी देसाई ने 10 अप्रैल 1995 को दुनिया को अलविदा कह दिया।

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