मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा का स्थापना दिवस आज, जानें इन तीनों राज्यों से जुड़ी खास बातें

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चैतन्य भारत न्यूज

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा को अलग राज्य बने हुए आज यानी 21 जनवरी को पूरे 48 साल हो गए हैं। अधिनियम 1971 के तहत मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा को 21 जनवरी 1972 को अलग राज्य का दर्जा दिया गया था। आइए जानते हैं इन तीनों राज्यों के बारे में।



मणिपुर स्थापना दिवस

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मणिपुर का शाब्दिक अर्थ ‘आभूषणों की भूमि’ है। भारत की स्वतंत्रता के पहले यह रियासत थी। आजादी के बाद यह भारत का एक केंद्रशासित राज्य बना। मणिपुर की राजधानी इम्फाल है। मणिपुर में कई संस्कृतियों के लोग रहते हैं जैसे कुकी, नागा, पांगल और मिजो, जो कई भाषाएं बोलते हैं। मणिपुर का कुल क्षेत्रफल करीब 22,347 वर्ग किमी।है। 21 जनवरी, 1972 को मणिपुर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला और 60 निर्वाचित सदस्यों वाली विधानसभा गठित की गई। इसमें 19 अनुसूचित जनजाति और 1 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। राज्य में लोकसभा में दो और राज्यसभा में एक प्रतिनिधि है।

मेघालय स्थापना दिवस

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मेघालय का गठन असम के अंतर्गत 2 अप्रैल, 1970 को एक स्वायत्तशासी राज्य के रूप में किया गया। लेकिन एक पूर्ण राज्य के रूप में मेघालय 21 जनवरी, 1972 को अस्तित्व में आया। मेघालय, जिसका शाब्दिक अर्थ है-मेघों का आलय यानी बादलों का घर, मूलतः एक पहाड़ी राज्य है। यहां मुख्यतः खासी, जयंतिया और गारो आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं। मेघालय बुनियादी तौर पर कृषि प्रधान राज्य है। यहां की लगभग 80 प्रतिशत जनसंख्या आजीविका के लिए मुख्य रूप से खेती-बाड़ी पर निर्भर है। मेघालय की राजधानी शिलांग है

त्रिपुरा स्थापना दिवस

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त्रिपुरा भारत का तीसरा सबसे छोटा राज्य है। इस राज्य के उत्तर पश्चिम और दक्षिण दिशा में बांग्लादेश है। राज्य के पूर्वी इलाके में मिजोरम और आसाम है। अगरतला त्रिपुरा की राजधानी है। 21 जनवरी 1972 को त्रिपुरा ने पूर्ण राज्‍य का दर्जा प्राप्‍त किया। त्रिपुरा का क्षेत्रफल सिर्फ 10,486 वर्ग किमी है। त्रिपुरा की संस्कृति काफी समृद्ध है। इस राज्य में करीब 19 जनजातीय है और आज भी जंगलों में रहना पसंद करती है। त्रि का अर्थ होता है जल और पुरा का अर्थ होता है निकट। ऐसा माना जाता है कि प्राचीन काल में यह समुंद्र के निकटतम इतना फैला था कि इसे त्रिपुरा के नाम से बुलाया जाने लगा। त्रिपुरा का उल्लेख महाभारत पुराणों तथा अशोक के शिलालेखों में भी मिलता है।

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