स्कूलों के आसपास जंक फूड के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के सीईओ पवन अग्रवाल ने सभी स्कूल परिसर और उसके आसपास के क्षेत्र में नुकसानदेह खाद्य पदार्थों (जंक फूड) के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव जारी किया है। यह प्रस्ताव स्कूली बच्चों के बीच सुरक्षित और पौष्टिक खाद्य को बढ़ावा देने के लिए जारी किया गया है।

पवन अग्रवाल ने कहा कि, एफएसएसएआई ने स्कूलों में सुरक्षित, पूर्ण और पौष्टिक भोजन की उपलब्धता पर एक मसौदा विनियमन तैयार किया है। इसे मंजूरी के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के पास भेजा गया है। स्कूल हेल्थकेयर पर हुए एसोचैम के एक सम्मेलन में अग्रवाल ने कहा कि, ‘हमने स्कूल परिसरों और उसके आसपास के 50 मीटर दायरे में वैसे खाद्य पदार्थों के विज्ञापन और प्रोत्साहन पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव किया है जो पौष्टिक नहीं होते हैं।’ बता दें साल 2018 में एफएसएसएआई ने मसौदा कानून तैयार कर कुछ सुझाव मांगे थे। इसमें स्कूल परिसर और उसके आसपास के क्षेत्रों में नूडल्स, चिप्स, कार्बोनेटेड पेय सहित अलग-अलग जंक फूड की बिक्री पर प्रतिबंध का प्रस्ताव था। एफएसएसएआई ने कहा था कि उसका उद्देश्य चिप्स, मीठा कार्बोनेटेड और गैर-कार्बोनेटेड पेय, रेडी-टू-ईट नूडल्स, पिज्जा, बर्गर जैसे कई जंक फूड की खपत और उपलब्धता को सीमित करना है।

गौरतलब है कि मार्च 2015 में दिल्ली हाई कोर्ट ने खाद्य नियामक से स्कूली बच्चों के लिए पौष्टिक खाद्य को प्रोत्साहन देने के लिए नियम बनाने के लिए कहा था। अग्रवाल ने बताया कि, ‘करीब तीन साल पहले हाई कोर्ट ने हमसे स्कूली बच्चों के लिए पौष्टिक खाद्य पदार्थ पर नियम बनाने के लिए कहा था। हमने इसके लिए संघर्ष किया। क्योंकि यदि आप को एक कानून बनाना है तो उसे लागू भी किया जाना है।’ अग्रवाल ने कहा कि, ‘आप कैसे किसी भोजन को स्वस्थ कह सकते हैं? हम यह नहीं कह सकते कि एमएनसी से आने वाले खाद्य पदार्थ नुकसानदेह होते हैं। कुछ भारतीय खाद्य पदार्थ भी नुकसानदेह होते हैं। इसलिए हमारे पास एक पैमाना होना चाहिए जो स्वस्थ खाद्य पदार्थ तय कर सके।’

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