भगवान गणेश ने क्यों लिया ‘विकट’ अवतार, जानिए इसका रहस्य

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चैतन्य भारत न्यूज

2 सितंबर से गणेश उत्सव की शुरुआत हो गई है। प्रत्येक घर में गणेश जी के अलग-अलग स्वरूपों की स्थापना की जाती है। बता दें भगवान गणेश के कुल 8 स्वरुप हैं। इनमें से छटवां स्वरुप ‘विकट’ है। यह कामासुर का वध करने वाला कहा जाता है। इनका वाहन मयूर(मोर) है। लेकिन भगवान गणेश को क्यों विकट कहा जाता है? आइए जानते हैं इसके पीछे की कहानी-

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विकट क्यों बने गणेश?

पुराणों में बताया गया कि, भगवान विष्णु जब जलंधर का वध करने के लिए वृंदा का तप नष्ट करने पहुंचे तो उसी समय उनके शुक्र से एक अत्यंत तेजस्वी असुर पैदा हुआ। वह कामाग्नि से पैदा हुआ था इसीलिए उसका नाम कामासुर हुआ। कामासुर ने दैत्यगुरु शुक्राचार्य से दीक्षा प्राप्त करके भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र का जाप, अन्न, जल का त्याग करते हुए कठोर तपस्या की। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे दिव्य दर्शन दिए।

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इस दौरान उसने शिव जी से ब्रह्माण्ड का राज्य, शिवभक्ति तथा म्रत्युन्जयी होने का वरदान प्राप्त किया। इसके बाद कामासुर ने धीरे-धीरे पृथ्वी के समस्त राजाओं को जीत लिया। साथ ही स्वर्ग पर भी आक्रमण कर दिया। चारो तरफ छल कपट का साम्राज्य स्थापित हो गया। धर्म कर्म सब नष्ट हो गए । सभी देवी, देवता, ऋषि, मुनि दर-दर भटकने लगे। कामासुर के अत्याचारों से मुक्ति पाने के लिए सभी देवताओं ने श्री गणेश के विकट स्वरुप की भक्ति की। उनकी इस उपासना से प्रसन्न होकर श्री विकट गणेश प्रकट हुए। श्री विकट गणेश ने देवताओं से वरदान मांगने को कहा तब सभी देवी देवताओं ने कामासुर के अत्याचार के अंत की प्रार्थना की।

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इसके बाद भगवान विकट ने कामासुर को चेताया कि तूने श्री शिव के वरदान से अधर्म मचाया है मगर अब तेरा अंत निश्चित है अगर अपना जीवन चाहता है तो सभी देवी देवताओं से वैर छोड़ कर मेरी शरण में आ जा अन्यथा तेरी मृत्यु निश्चित है। इस दौरान कामासुर ने क्रोधित होकर श्री विकट पर अपनी गदा फेक कर प्रहार किया लेकिन कामासुर का प्रहार विफल हो गया।

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जब श्री विकट ने क्रोध भरी दृष्टि से कामासुर को देखा तो वो मुर्छित हो गया और पृथ्वी पर गिर गया और उसकी समस्त शक्तियां चली गईं। कामासुर डर गया और विकट श्री गणेश के चरणों में अपना सिर रख कर क्षमा याचना करने लगा। श्री विकट ने भी कामासुर को माफ कर दिया। सब देवी देवता गण श्री मयुरेश भगवान विकट की जय जय कार करने लगे। तभी से भगवान गणेश के विकट स्वरुप को पूजा जाने लगा।

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