आज है गंगा सप्तमी, जानिए कैसे हुई थी मां गंगा की उत्पत्ति

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चैतन्य भारत न्यूज

गंगा को हिंदू धर्म में मां का दर्जा प्राप्त है। वैशाख मास के शुक्‍ल पक्ष की सप्‍तमी को गंगा सप्‍तमी के रूप में मनाया जाता है। इस बार गंगा सप्‍तमी 30 अप्रैल को यानी आज है। वैसे इस दिन को गंगा मां के दूसरे जन्‍म की तिथि के रूप में मनाया जाता है। दरअसल, पहली बार धरती पर गंगा मां का आगमन ज्‍येष्‍ठ शुक्‍ल दशमी अर्थात दशहरे के दिन हुआ था। इसलिए इस दिन को गंगा दशहरा भी कहा जाता है। आइये जानते है गंगा मां के अवतरण की कथा-

गंगा के अवतरण की कथा

  • एक पौराणिक कथा के अनुसार गंगा मां का जन्म भगवान विष्णु के पैर के पसीनें की बूंदों से हुआ है।
  • वहीं दूसरी कथा में कहा गया है कि, गंगा मां का जन्म भगवान ब्रह्रा के कमंडल से हुआ था।
  • इसके अलावा एक ये भी मान्यता है कि गंगा सप्तमी वाले दिन ही ब्रह्मलोक में रास करने के दौरान राधा-कृष्ण एक-दूसरे में इतने लीन हो गए कि दोनों मिलकर जल बन गए। उसी जल को ब्रह्मा ने अपने कमंडल में जगह दी।
  • एक अन्य मान्यता है कि वामन रूप में राक्षस बलि से संसार को मुक्त कराने के बाद ब्रह्मदेव ने भगवान विष्णु के चरण धोए और इस जल को अपने कमंडल में भर लिया।
  • सबसे प्रचलित कथा में ये बताया गया है कि, भगीरथ पृथ्वी पर कपिल मुनि के श्राप से ग्रसित राजा सगर के 60,000 पुत्रों की अस्थियों के उद्धार और सभी प्रणियों के जीवन की रक्षा के लिए घोर तपस्या करके मां गंगा को धरती पर लेकर आए थे। जब स्वर्ग लोक में बह रही गंगा मां धरती पर आने को तैयार हुईं तो पूरी धरती कांप उठी। उस दौरान राजा भगीरथ ने भगवान शिव से प्रार्थना कर गंगा मां के वेग (तेजी) को कम करने का आग्रह किया। फिर गंगा मां भगवान शिव की जटाओं में समा गईं थीं। इसके बाद गंगा मां कैलाश से बहते हुए फिर धराधाम पर आईं।

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