माघ मेले से पहले काला हुआ गंगा का जल, संत समाज ने किया प्रशासन से लड़ाई का ऐलान

चैतन्य भारत न्यूज

प्रयागराज में संगम की रेती पर विश्व प्रसिद्ध माघ मेला 14 जनवरी से शुरू होगा। प्रयागराज में संगम किनारे होने वाले माघ मेले के लिए प्रशासन तैयारियों में जुट गया है। इस मेले की तैयारियां लगभग पूरी हो चली है। कोरोना काल में तमाम चुनौतियों के बीच माघ मेले का शुरू होना आशा की एक नई किरण जागना है। माघ मेले का पहला स्नान 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन है। हालांकि, माघ मेले के पहले स्नान पर्व से ठीक पहले गंगा का जल काला होने पर संतों में नाराजगी है।

संतों ने याद दिलाया 19 साल पहले किया गया आंदोलन

सूत्रों के मुताबिक, संतों ने गंगा नदी का पानी काला होने की बात पर स्थानीय प्रशासन से सीधे तौर पर लड़ाई का ऐलान कर दिया है। संत समाज का कहना है कि, ‘अगर गंगा में पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा गया तो पहले स्नान पर्व के पूर्व 19 साल पहले किए गए आंदोलन को दोहराया जाएगा और स्नान भी बाधित हो सकता है।’ स्वामी हरिचैत्न्य ब्रह्मचारी ने स्थानीय प्रशासन को चेताया कि, ‘2001 में किया गया आंदोलन सभी को याद होगा। अगर प्रशासन चाहता है कि हरिचैत्न्य ब्रह्मवारी वो द़ृश्य दोहराएं तो हम तैयार हैं। गंगा हमारी मां है और हर श्रद्धालु को स्नान के लिए स्वच्छ जल मिलना ही चाहिए।’

उन्होंने आगे कहा कि, ‘गंगा में 32 नाले गिरते हैं सभी एसटीपी की जांच होनी चाहिए।’ वहीं गंगा सेना शिविर के संचालक योगगुरु स्वामी आनंद गिरि का कहना है कि, ‘गंगा एक दो लोग नहीं करोड़ों भारतवंशियों की आस्था से जुड़ी है। ऐसे में गंगा का जल शुद्ध होना ही चाहिए।’ इस मामले में मनकामेश्वर मंदिर के प्रमुख आचार्य स्वामी श्रीधरानंद ब्रह्मचारी का कहना है कि, ‘गंगा को लेकर आस्था से लगातार खिलवाड़ किया जा रहा है। इस पर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।’

बुधवार को लिए गए थे गंगाजल के नमूने

गंगा नदी का पानी काला होने के बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने बुधवार को पानी के नमूने लिए थे। साथ ही टीम ने कुल 18 नालों का भी नमूना लिया था और चार जगह गंगा व एक जगह यमुना जल का सैंपल लिया। इसे जांच के लिए लैब में भेजा गया है। इस बारे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी प्रदीप विश्वकर्मा ने कहा कि, ‘गंगा जल काला नहीं है। गंगा की तलहटी जैसी होती है रंग वैसा ही दिखता है। जो नमूने लिए गए हैं वो हमारे रूटीन जांच का हिस्सा है। इसे हम हर महीने करते हैं। पांच दिन बाद लिए गए नमूनों की रिपोर्ट आएगी।’

गंगा में गिरते हैं 32 नाले

जानकारी के मुताबिक, गंगा नदी में 32 नाले गिर रहे हैं। हालांकि, प्रशासन का दावा है कि सभी नालों को टेप कर दिया गया है। जो पानी आ रहा है वो एसटीपी के जरिए शोधित होकर आता है। लेकिन गंगा के किनारे रहने वाले लोगों की मानें तो रात के समय टेप हट जाते हैं और नाले का पानी सीधे गंगा नदी में गिरता है।

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