शेयर बाजार पर असर डालती है जीडीपी ग्रोथ

टीम चैतन्य भारत

देश की आर्थिक सेहत और शेयर बाजार में गहरा संबंध होता है। आर्थिक विकास दर बढ़ने का सीधा असर शेयर बाजार के रुझान पर नजर आता है। मतलब यह कि यदि कोई देश तेजी से आर्थिक तरक्की कर रहा हो, तो वहां के शेयर बाजार में भी तेजी आएगी।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2018-19 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ गई। इससे पहले वाली तिमाही में कमजोर ग्रोथ इसकी सबसे बड़ी वजह रही। इस परिदृश्य में मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान देश के सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) की वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रही।

ये आंकड़े जारी होने से पहले अंदाजा लगाया जा रहा था कि वित्त वर्ष 2018-19 की पूरी अवधि में देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहेगी, लेकिन बाद में इसमें संशोधन किया गया और यह अनुमान घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक हालांकि तीसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रही, लेकिन पहली तिमाही में यह दर 8 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 7 प्रतिशत रही थी। इसका असर मुकम्मल वित्त वर्ष के अंतिम आंकड़ों पर नजर आएगा।

प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों की वृद्धि दर पर एक नजर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर: तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में इस क्षेत्र की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रही, जो दूसरी तिमाही में 6.9 प्रतिशत थी।

कृषि क्षेत्र: तीसरी तिमाही में इस सेक्टर की वृद्धि दर 2.7 प्रतिशत दर्ज की गई, जो दूसरी तिमाही में 4.2 प्रतिशत थी। खनन क्षेत्र: अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में इस क्षेत्र की वृद्धि दर केवल 1.3 प्रतिशत रह गई, जबकि दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में इस सेक्टर ने 2.1 प्रतिशत ग्रोथ हासिल की थी।

निर्माण क्षेत्रः तीसरी तिमाही में इस सेक्टर की वृद्धि दर बढ़कर 9.6 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई, जो दूसरी तिमाही में 8.5 प्रतिशत थी। लोक प्रशासन: तीसरी तिमाही में इस क्षेत्र की वृद्धि दर घटकर 7.6 प्रतिशत रह गई, जो दूसरी तिमाही में 8.7 प्रतिशत थी।

वित्तीय सेवाएंः इस क्षेत्र की वृद्धि दर में कोई खास बदलाव नहीं आया। तीसरी तिमाही में इस सेक्टर को 7.3 प्रतिशत ग्रोथ हासिल हुई, जबकि दूसरी तिमाही में इसकी ग्रोथ 7.2 प्रतिशत रही थी।

ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशंस आदि: तीसरी तिमाही में इन औद्योगिक क्षेत्रों की वृद्धि दर दूसरी तिमाही के समान 6.9 प्रतिशत रही।

आगे का अनुमान

अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2019-20 में देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहेगी, जो जोखिम कारकों को संतुलित करने के बाद पहली छमाही की 7.2 प्रतिशत और तीसरी तिमाही की 7.5 प्रतिशत के बीच का आंकड़ा है।

शेयर बाजार पर असर

असल में जीडीपी किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की सेहत का पैमाना होता है और जैसा कि विशेषज्ञों का विश्लेषण है, जीडीपी में कोई भी ग्रोथ शेयर बाजार की स्थिति से मेल खाती है। जब कभी बिजनेस सेक्टर अपने उत्पादन और आय में वृद्धि दर्शाता है, जीडीपी बढ़ने के रुप में अर्थव्यवस्था पर इसका असर नजर आता है। इसी तरह जब कभी सामान और सेवाओं की यील्ड में गिरावट आती है, अर्थव्यवस्था इससे भी प्रभावित होती है।

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