सोच में आया बदलाव, बेटियों को गोद लेने में प्राथमिकता, बढ़ी संख्या

girls adoption

चैतन्य भारत न्यूज 

भोपाल. भारत में लोग गोद लेने के मामले में बेटों से ज्यादा बेटियों को महत्व दे रहे हैं। अनाथ आश्रम या शिशु गृह संस्थाओं में गोद लेने के लिए लोगों की प्राथमिकता में अब बेटियां आगे हैं। यह जानकारी केंद्र सरकार की एजेंसी केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) के आंकड़ों से मिली है। कारा में गोद लेने के लिए आने वाले आवेदनों के तीन साल के आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान 9860 बच्चों को गोद लिया गया। इनमें से 5787 लड़कियां और 4073 लड़के शामिल हैं।

कारा के मुताबिक देश में सबसे अधिक बच्चे महाराष्ट्र में गोद लिए गए, इसमें भी लड़कियों की संख्या ज्यादा है। दूसरे स्थान पर कर्नाटक, तीसरे पर ओडिशा और चौथे स्थान पर मध्यप्रदेश है। तीन साल में करीब 59 प्रतिशत लड़कियां और 41 फीसदी लड़के गोद लिए गए। संस्था संचालकों का कहना है कि गोद लेने वाले दंपतियों की पारिवारिक परिस्थिति और आर्थिक स्थिति को भी देखा जाता है। गोद लेने वाले अधिकतर दंपती संपन्न और पढ़े- लिखे हैं।

बेटियों को गोद लेने की एक बड़ी वजह यह भी है। जहां तक गोद लेने वालों की पहचान छुपाने का प्रश्न है, गोद लेने वाले दंपति अपनी पहचान बताना नहीं चाहते, ताकि बच्चे को बाद में इस बात का पता न चले। जानकारों का कहना है कि समय के साथ लोगों की सोच में बदलाव आ रहा है। पहले जो बेटी लोगों के लिए बोझ मानी जाती थी, वहीं आज समानता का अधिकार मिलने से बेटियों को गोद लेना पसंद किया जा रहा है।

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