42 साल बाद बड़ा बदलाव लगभग तय, बेटियों की शादी की न्यूनतम उम्र बदलेगी, मुस्लिम भी आ सकते हैं दायरे में

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चैतन्य भारत न्यूज 

नई दिल्ली. शारदीय नवरात्रि शुरू होने के ठीक पहले युवतियों के सशक्तीकरण की एक और पहल सामने आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एक बार फिर कहा कि टास्क फोर्स की रिपोर्ट आते ही केंद्र सरकार लड़कियों के विवाह की न्यूनतम उम्र (18 वर्ष) में बदलाव का निर्णय लेगी। केंद्र सरकार ने चार जून को इस विषय पर विचार के लिए जया जेटली की अध्यक्षता में टास्क फोर्स का गठन किया था। टास्क फोर्स अपनी रिपोर्ट तैयार कर चुकी है और जल्दी ही सरकार को सौंप सकती है। इसके पहले भी पीएम मोदी केंद्रीय बजट पर चर्चा में, लाल किले के भाषण में इस ऐतिहासिक बदलाव पर बात कर चुके हैं। लड़कियों की शादी के लिए न्यूनतम उम्र 21 साल की जा सकती है।

दरअसल, कई मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट भी सरकार से पूछ चुके हैं कि लड़के और लड़की की शादी की न्यूनतम उम्र में अंतर क्यों हैं। लड़कियों के लिए यह 18 साल तो लड़कों के लिए 21 साल है। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक टास्क फोर्स ने भी लड़कियों के विवाह की न्यूनतम उम्र में बदलाव की सिफारिश की है। यदि बदलाव होता है तो 42 साल बाद विवाह की उम्र बदलेगी।

टास्क फोर्स ने यह भी विचार किया है कि यह बदलाव सभी वर्गों और धर्मों पर समान रूप से लागू हो। अभी तक मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक लड़कियों के लिए निकाह की न्यूनतम उम्र उनके रजस्वला होने पर रखी गई है। यानी यह 18 वर्ष से कई साल कम है। गुजरात हाई कोर्ट 2014 में यह व्यवस्था दे चुका है कि मुस्लिम समुदाय में लड़का-लड़की 15 साल के होने के बाद पर्सनल लॉ के हिसाब से शादी के योग्य हैं।

टास्क फोर्स ने शादी की उम्र को शिशु मृत्यु दर, जच्चा मृत्यु दर, प्रजनन दर और लिंगानुपात जैसे सामाजिक सुरक्षा के मानकों से जोड़ दिया है और इस बात की सिफारिश की है कि समाज के किसी भी वर्ग को उक्त वजहों से कमजोर स्थिति में नहीं छोड़ा जा सकता है।

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