उत्तराखंड : भारत-चीन सीमा में ग्लेशियर टूटा, 8 लोगों की गई जान, सेना ने 391 को बचाया, कई लोगों के अब भी फंसे होने की आशंका

चैतन्य भारत न्यूज

देहरादून. कोरोना काल में उत्तराखंड में एक और प्राकृतिक आपदा ने लोगों को मुसीबत में डाल दिया है। चमोली जनपद से लगे भारत-चीन (तिब्बत) सीमा क्षेत्र सुमना में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कैंप के समीप ग्लेशियर टूटकर मलारी-सुमना सड़क पर आ गया है। हिम्सखलन में सैकड़ों लोग फंस गए, जिन्हें बचाने के लिये सेना दिन रात लगी हुई है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कमांडर कर्नल मनीष कपिल ने इसकी पुष्टि की है।

सेना के मुताबिक, अब तक 391 लोगों को बचाया और उन्हें सुरक्षित जगह पर ले जाया गया, जिनमें 6 लोग गंभीर है। जबकि 8 शव अब तक बरामद हुए। दरअसल, पिछले 5 दिन से लगातार बर्फबारी और बारिश के चलते सुमना के पास शुक्रवार को शाम क़रीब 4 बजे सुमना रिमखिम रोड से 4 किलोमीट आगे हिम्सखलन आ गया, जिसमें बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइज़ेशन का एक कार्यालय और दो लेबर कैंप उसकी चपेट में आ आ गए।

उत्तराखंड के सीएम तीरथ सिंह रावत ने कहा है कि, नीति घाटी के सुमना में ग्लेशियर टूटने की घटना का गृह मंत्री अमित शाह ने तुरंत संज्ञान लिया है और मदद का आश्वासन दिया है तथा साथ ही आईटीबीपी को सतर्क रहने का आदेश दिया है।
जानकारी के मुताबिक, चूंकि सेना के कैंप प्रभावित क्षेत्र से 3 किलोमीटर की दूरी पर था तो राहत बचाव का काम जल्द शुरू कर दिया गया, लेकिन बारिश और ख़राब मौसम के चलते लगातार बचाव कार्य में बाधा आती रही बावजूद उसके सेना लगातार डटी रही। रात भर चलाए गए ऑप्रेशन में पहले बीआरओ कैंप में फंसे जीआरईएफ के 150 कर्मचारियों और मज़दूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों कैंप में लगातार राहत बचाव का काम जारी है। ताकि जल्द से जल्द सबको सुरक्षित बारह निकाला जा सके। सभी बचाए गए लोगों को सेना के कैंप में रखा गया है। चूंकी कोरोना की महामारी है। लिहाजा सेना भी पूरे प्रोटोकॉल के तहत ही कार्रवाही में जुटी है।

बर्फ के नीचे फंसे होने की आशंका

जानकारी के मुताबिक, अभी भी कैंप और सड़क निर्माण स्थल में कई लोगो के बर्फ के नीचे फंसे होने की आशंका है। इसलिए उन्हें निकालने के प्रयास जारी से राहत बचाव के काम के लिए सेना के हैलिकॉप्टर और पर्वतारोही बचाव दल को स्टैंड बाय पर रखा है। ताकि जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल किया जा सके।

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