पेड़ों को कटने से बचाने के लिए उन्हें पहना दिए जूते, 7 साल की दिव्यांशी की इस पेंटिंग को गूगल ने बनाया डूडल

children day google doodle

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. गूगल साल 2009 से बाल दिवस पर डूडल लगाने के लिए बच्चों के बीच प्रतियोगिता आयोजित करवा रहा है। जो इस प्रतियोगिता में प्रथम आता है उसका डूडल होम पेज पर दिखता है। इस साल प्रतियोगिता की थीम थी ‘When I grow up, I hope’ जिसमें गुरुग्राम की रहने वाली 7 साल की दिव्यांशी सिंघल प्रथम आई। दिव्यांशी ने बेहद खास और रंग-बिरंगा डूडल बनाया। इस डूडल में पहाड़, पेड़ और हरा मैदान दिखाया गया था, जिसमें बच्चे खेल सकते हैं।


5 लाख रुपए की स्कॉलरशिप मिली

नन्ही दिव्यांशी का डूडल ‘Walking Trees’ थीम पर बना है। दिव्यांशी ने अपने डूडल के जरिए आने वाली पीढ़ियों के लिए वनों के संरक्षण और पेड़ों को काटने से रोकने का संदेश दिया है। अपने गूगल डूडल में दिव्यांशी ने पेड़ों को चलते हुए दिखाया है और उन्हें जूते पहनाए हैं। इस चित्र में दिव्यांशी ने यह दर्शाया है कि यदि पेड़ों के पास अपने पैर होते तो वे प्रदूषण से बचकर कहीं शुद्व वातावरण वाले स्थान पर चले जाते। इस तरह वे विकास की भेंट चढ़ने से भी बच जाते। जानकारी के मुताबिक, प्रतियोगिता में गूगल को 1.1 लाख एंट्रीज़ मिली और ये सभी चित्र 1 से 5 तक की कक्षा वाले बच्चों ने बनाए थे। इनमें से दिव्यांशी सिंघल की इस पेंटिंग को चुना गया। ‘डूडल फॉर गूगल’ प्रतियोगिता में राष्ट्रीय विजेता का खिताब जीती दिव्यांशी को पुरस्कार स्वरूप गूगल की ओर से पांच लाख रुपए की स्कॉलरशिप दी गई है। साथ ही गूगल की ओर से दिव्यांशी के स्कूल प्रबंधन को भी दो लाख रुपए तकनीकी विकास के लिए दिए गए हैं। दिव्यांशी को सर्टिफिकेट, ट्रॉफी देने के साथ ही गूगल के कार्यालय में जाने का अवसर मिला है।

कौन है दिव्यांशी

दिव्यांशी सेक्टर-45 स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल में दूसरी की छात्रा है। उनकी माता दीप्ति सिंघल ने बताया कि, दिव्यांशी को बचपन से ही पेड़-पौधों से बेहद लगाव है। उन्होंने बताया कि सितंबर में ब्राजील के अमेजन के जंगलों में लगी आग में जले पेड़ों की घटना से दिव्यांशी काफी आहत थी। एक बार दिव्यांशी छुट्टियाें में नानी के घर लखनऊ गई थी। वहां उनके घर में पेड़ काट दिए गए थे, जिसे देख वह बहुत रोई। दरअसल, दिव्यांशी को स्कूल में पढ़ाया गया था कि पेड़ों से मिलने वाले ऑक्सीजन उनके कटने से ही कम हो रही है। फिर दिव्यांशी की मां ने उनका रोना बंद कराया और एक ड्रॉइंग शीट देकर कहा कि, ‘पेड़ों के कटने से उसके दिमाग में जो कुछ भी ख्याल आ रहा है, उसे इस पर चित्र बनाकर दिखाओ।’ इसके बाद दिव्यांशी ने यह तस्वीर बनाई।

ये भी पढ़े…

जानिए कब और कैसे हुई 14 नवंबर को बाल दिवस मनाने की शुरुआत

विश्व आदिवासी दिवस : जानिए आदिवासियों से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें

जन्मदिन विशेष : इस शख्स के कारण हुआ सिनेमा का जन्म, गूगल ने खास अंदाज में याद कर बनाया डूडल

Related posts