30 साल पहले क्यों गिराई गई थी बर्लिन की दीवार? जानें जर्मनी के इतिहास में क्यों है यह खास

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चैतन्य भारत न्यूज

09 नवंबर 1989 के दिन बर्लिन की दीवार गिरा दी गई थी। ये जर्मनी ही नहीं दुनियाभर के लिए एक ऐतिहासिक दिन था। गूगल ने इसकी याद में आज एक खास गूगल डूडल बनाया है। इस दीवार ने 28 सालों तक बर्लिन शहर को पश्चिम और पूर्व में बांटा था। इसे गिरे अब तीस साल बीत चुके हैं। बर्लिन शहर को दो हिस्सों में बांटने वाली दीवार 13 अगस्त 1961 को खड़ी की गई थी।



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दरअसल दूसरे विश्व युद्ध के बाद जर्मनी दो देशों में बंट गया था, तो सैंकड़ों कारीगर और व्यवसायी प्रतिदिन पूर्वी बर्लिन को छोड़कर पश्चिमी बर्लिन जाने लगे। बहुत से लोग राजनीतिक कारणों से भी समाजवादी पूर्वी जर्मनी को छोड़कर पूंजीवादी पश्चिमी जर्मनी जाने लगे। इससे पूर्वी जर्मनी को आर्थिक और राजनीतिक रूप से बहुत हानि होने लगी।

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बर्लिन दीवार का उद्देश्य इसी प्रवासन को रोकना था। इस दीवार के विचार की कल्पना वाल्टर उल्ब्रिख्त के प्रशासन ने की और सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव ने इसे मंजूरी दी। हालांकि इस दीवार का बनना समाजवादी गुट के प्रचार तंत्र के लिए बहुत बुरा साबित हुआ। पश्चिम के लोगों के लिए यह समाजवादी अत्याचार का प्रतीक बन गई, खास तौर पर जब बहुत से लोगों को सीमा पार करते हुए गोली मार दी गई। बहुत से लोगों ने सीमा पार करने के अनोखे तरीके खोजे। इसमें सुरंग, गरम हवा के गुब्बारे, दीवार के ऊपर गुजरती तारों पर खिसकना शामिल था।

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जब लोगों ने इस दीवार को तोड़ा तो इसके टुकड़े याद के तौर पर ले आए। बर्लिन दीवार के गिरने से पूरे जर्मनी में नए राष्ट्रवाद का उदय हुआ। इसके परिणामस्वरूप पूर्वी जर्मनी के लोगों ने जर्मनी के साथ एकीकरण पर मंजूरी दी और 3 अक्टूबर 1990 को जर्मनी फिर एक देश बन गया।

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