उप्र में 5-10 नहीं बल्कि 5 हजार से भी ज्यादा ‘अनामिका’ जैसी फर्जी शिक्षिकाएं हैं, सरकार ने 20 जून तक सैलरी लौटाने का वक्त दिया

चैतन्य भारत न्यूज

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में शिक्षकों की भर्ती के घोटाले से संबंधित कई मामले सामने आ रहे हैं। यहां फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करने वाले शिक्षकों पर अब सरकार शिकंजा कस रही है। राज्य में में 6 फर्जी शिक्षकों से पैसे की रिकवरी के लिए नोटिस भेजा गया है। इन शिक्षकों के खिलाफ पहले से ही केस दर्ज है।

जानकारी के मुताबिक, शिक्षकों की नियुक्ति पर जांच बैठाई जा चुकी है। अब सरकार ने इनसे नौकरी के दौरान दी गई सैलरी को रिकवर करने का फैसला किया है। पुलिस भी पूरे मामले की पड़ताल कर रही है। जांच के दौरान पता चला कि फर्जी शिक्षकों में कई तो ऐसे हैं जिन्होंने किसी और के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर नौकरी हासिल की है। जबकि कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं जिन्होंने अपनी डिग्री किसी फर्जी यूनिवर्सिटी से बनवाई है। इसी आधार पर ये शिक्षक वर्षों से नौकरी कर रहे थे।

राज्य में करीब 5 हजार फर्जी शिक्षक

जांच के दौरान पता चला है कि पूरे राज्य में फर्जी शिक्षकों की संख्या करीब पांच हजार से करीब है। जैसे-जैसे विभागीय जांच शुरू की जाएगी, ये आंकड़े और ज्यादा बढ़ सकते हैं। सरकार ने सभी शिक्षकों को 20 जून तक का वक्त दिया है। 20 जून तक इन फर्जी शिक्षकों को जितनी भी सैलरी मिली है, उन्हें उसे लौटना होगा। यदि इन लोगों ने पैसे नहीं लौटाए तो सरकार उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई करेगी।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में अनामिका शुक्ला नाम की एक कॉन्ट्रैक्ट बेस्ड टीचर ने पिछले करीब 13 महीनों में 25 अलग-अलग कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में फर्जी तौर पर शिक्षिका के पद पर नौकरी की। अनामिका शुक्ला यहां के कस्तूरबा विद्यालय फरीदपुर में विज्ञान की शिक्षिका के रूप में सेवाएं दे रही थी। वह पिछले 13 महीनों से 25 अलग-अलग स्कूलों से सैलरी लेती रही लेकिन विभाग में किसी को इसकी जानकारी तक नहीं लगी। इस शिक्षिका ने एक करोड़ से अधिक रुपए कमा लिए। शनिवार को कासगंज पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।

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