राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग का बड़ा फैसला, नए मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए नियमों में किया बदलाव

चैतन्य भारत न्यूज

देश में नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की राह आसान करते हुए नवगठित राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने पहला बड़ा फैसला लिया है। NMC ने नए मेडिकल कॉलेज खोलने और उससे संबद्ध शिक्षण अस्पतालों के लिए न्यूनतम पांच एकड़ जमीन की आवश्यकता के प्रावधान को हटा दिया है। साथ ही कौशल प्रयोगशालाएं बनाना अनिवार्य कर दिया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और शैक्षणिक वर्ष 2020-21 से एमबीबीएस की वार्षिक सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव करने वाले मेडिकल कॉलेजों पर लागू अनिवार्यताओं के विस्तृत नियम ‘वार्षिक एमबीबीएस प्रवेश नियमों के लिए न्यूनतम आवश्यकताएं (2020)’ जारी किए हैं। संक्रमण काल (ट्रांजिटरी पीरियड) में पहले से स्थापित मेडिकल कॉलेजों पर वर्तमान अधिसूचना से पूर्व के संबंधित वर्तमान नियम लागू होंगे।

क्यों लिया गया फैसला

मेडिकल शिक्षा की महंगी फीस और सीटों की कमी को देखते हुए राष्ट्रीय मेडिकल आयोग ने शनिवार को ये कदम उठाए हैं। ये नियम एमबीबीएस के सभी नए कॉलेजों के लिए तो लागू होंगे ही जो मौजूदा कॉलेज अगले सत्र से अपनी सीटें बढ़ाना चाहेंगे, वे भी नए नियम का फायदा उठा सकेंगे।

कौन से नियम बदले गए

  • मेडिकल कॉलेज और इससे संबद्ध अस्पताल के लिए न्यूनतम जमीन की शर्त को खत्म कर दिया गया है।
  • छात्रों के उपयोगी गतिविधियों और फंक्शनल एरिया के लिए न्यूनतम क्षेत्र तय कर दिया गया है।
  • विभिन्न विभाग अपनी शिक्षण सुविधाओं को आपस में साझा कर सकेंगे। हालांकि, इन्हें भवन निर्माण संबंधी नियमों का पालन करना होगा।
  • सभी डिपार्टमेंट की क्लास में ई-लर्निंग व्यवस्था करने को भी कहा गया है।
  • नए प्रावधानों में स्किल लैब को भी अनिवार्य कर दिया गया है।
  • लाइब्रेरी के लिए न्यूनतम क्षेत्र और किताबों व जर्नल की न्यूनतम संख्या में भी कमी की गई है।
  • मेडिकल पढ़ाई के दौरान छात्रों के तनाव को देखते हुए काउंसलिंग सेवा को अनिवार्य कर दिया गया है।
  • विजिटिंग फेकल्टी की व्यवस्था की गई है। डिपार्टमेंट ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन शुरू किया जाएगा।
  • अब पढ़ाई शुरू करने से कम से कम दो साल पहले से पूरी तरह कार्यरत 300 बेड का मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल जरूरी होगा। पहले यह अवधि तय नहीं थी।
  • इन अस्पतालों के टीचिंग बेड में 10 प्रतिशत की कमी की गई है।

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