ऑनलाइन स्ट्रीमिंग के कंटेंट को सरकार ने सेंसर करने से किया इनकार, जानें क्यों बढ़ा इसका चलन

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. केंद्रीय इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री संजय धोत्रे ने गुरुवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में कहा कि, ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म पर प्रसारित होने वाली सामग्री पर केंद्र सरकार की सेंसरशिप लागू करने की कोई योजना नहीं है।



बता दें देश के कई कोर्ट में ऑनलाइन स्ट्रीमिंग साइटों पर सेंसरशिप लागू करने को लेकर याचिकाएं दायर की गई हैं। याचिका में इन साइटों पर दिखाई जाने वाली सामग्री को अश्लील बताया गया है। इसे लेकर राज्यसभा में बहस हुई। संजय धोत्रे ने कहा कि, ‘सरकार संविधान में दी गई अभिव्यक्ति की आजादी के लिए प्रतिबद्ध है। सुप्रीम कोर्ट और कई उच्च न्यायालयों में ऑनलाइन स्ट्रीमिंग के खिलाफ तमाम याचिकाएं लंबित हैं, लेकिन सरकार अपनी ओर से कोई सेंसरशिप लागू नहीं करेगी। सूचना तकनीक एक्ट में आपत्तिजनक ऑनलाइन सामग्री हटाए जाने का प्रावधान है।’

क्यों बढ़ा वेब सीरीज का चलन

वैसे अगर पिछले दो सालों पर ही गौर करें तो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वेब सीरीज ने धमाल मचा दिया है। इसकी एक वजह ये है कि कहानियों के साथ प्रयोग हो रहा है और नए कंटेट ने दर्शकों के बीच विकल्प दिया है। इसमें न तो टीवी पर दिखाए जाने वाले सास-बहू के घिसे-पिटे ड्रामा होते और ना ही लंबे-लंबे ब्रेक। वेब सीरीज में कंटेट सबसे बड़ा हथियार है। यहां प्रोड्यूसर-डायरेक्टर को बोल्ड कंटेट से लेकर कई ऐसे मुद्दों पर सीरीज बनाने की छूट होती है जिन्हें फिल्मों या सीरियल्स में आमतौर पर नहीं दिखाया जाता। फिल्मों में तो बोल्ड या एडल्ट कंटेट पर सेंसर बोर्ड की कैंची चल जाती है लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सेंसर जैसा कुछ नहीं है। चूंकि टेलीकॉम कंपनियों ने भी अपने ग्राहकों को कम चार्ज में इंटरनेट की सुविधा दे दी है तो ऐसे में दर्शकों के लिए ये वेब सीरीज देखना आसान हो गया है।

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