अब नहीं खरीद सकेंगे ऑनलाइन दवाएं, केंद्र सरकार ने सभी राज्यों में ऑनलाइन बिक्री रोकने का दिया आदेश

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चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने देश में सभी दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने सभी राज्यों से दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लगाने वाला दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश लागू करने को कहा है। इसकी जानकारी स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को दी।


सभी राज्यों को करना होगा आदेश का सख्ती से पालन

सीडीएससीओ के वरिष्ठ अधिकारी के. बंगारूराजन ने कहा कि, ‘केंद्रीय एजेंसी ने इस साल की शुरुआत में ही राज्यों को कोर्ट के आदेशानुसार दवाओं की ऑनलाइन बिक्री रोकने के लिए कहा था। इसके बाद कई बार स्मरण भी कराया गया। इस कड़ी में 28 नवंबर को एक बार फिर सख्त कदम उठाने के निर्देश जारी किए गए हैं।’ उन्होंने यह भी बताया कि, ‘सभी राज्यों को दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश का सख्ती से पालन करने को कहा गया है।’

नियम का उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई

बता दें दिल्ली हाईकोर्ट ने एक डॉक्टर की याचिका पर दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था। हाई कोर्ट ने सुनवाई करते हुए दिसंबर 2018 में आदेश दिया था कि, सरकार द्वारा ई-फार्मेसी को नियमित करने के लिए मसौदा नियम बनाने तक दवाओं की गैरकानूनी और बिना लाइसेंस की ऑनलाइन बिक्री को रोक दिया जाए। अधिकारी के मुताबिक, निर्देशों का पालन करने की जिम्मेदारी राज्य ड्रग कंट्रोलर की है। यदि कोई भी इसका उल्लंघन करते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि ऐसे कारोबारी या कंपनी पर क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।

बिना नियम के चल रहा कारोबार

जानकारी के मुताबिक, देश की सभी ऑनलाइन फार्मेसी बिना दवा लाइसेंस के काम कर रही हैं। दरअसल, सरकार ने अभी तक देश में दवाओं की ऑनलाइन बिक्री को लेकर कोई नियम नहीं बनाए हैं। बावजूद इसके 10 से ज्यादा ई-फार्मेसी कंपनियां हजारों करोड़ का कारोबार कर रही हैं। इनमें मेडलाइफ, नेटमेट्स, फार्मईजी और सिकोया की 1एमजी जैसी कंपनियों के शामिल हैं। इसके कारण पारंपरिक दवा दुकानों का कारोबार खतरे में आ गया। इससे उनकी बिक्री में 4 फीसदी गिरावट आई है। इन ई-फार्मेसी कंपनियों के खिलाफ दवा व्यापारियों का संगठन पिछले काफी समय से विरोध कर रहा है। उनका कहना है कि ये लोग उनके कारोबार को चुनौती दे रहे हैं। साथ ही ऑनलाइन बिक्री से दवाओं के गलत इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिल रहा है। हालांकि, ई-फार्मेसी से जुड़ी कंपनियों ने सरकार से नियमन बनाने की मांग की है, लेकिन अभी तक इस पर फैसला नहीं हुआ है।

 

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