इस सरकारी स्कूल में टीचर की गैरमौजूदगी में गणित की क्लास लेते हैं चपरासी कमल सिंह, फिजिक्स में ली मास्टर डिग्री

kamal singh

चैतन्य भारत न्यूज

अंबाला. हरियाणा के अंबाला स्थित मजरी में सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षकों की इतनी कमी हो गई कि यहां चपरासी को ही बच्चों को पढ़ाना पड़ रहा है। इस स्कूल में कुल 400 छात्रों के लिए महज 19 ही टीचर्स हैं।


एक टीचर पर 54 क्लासेस का भार

जानकारी के मुताबिक, स्कूल में गणित विषय के लिए क्वालिफाइड टीचर तो सिर्फ एक ही है। अकेले गणित के टीचर पर हफ्ते में 54 क्लासेज लेने की जिम्मेदारी है जो मुश्किल काम है। साथ ही उन्हें चुनाव की ड्यूटी में भी लगा दिया गया था और अन्य जिम्मेदारियां दे दी थी। ऐसी स्थिति में चपरासी कमल सिंह को दो-दो काम करने पड़े। कमल सिंह स्कूल में अपनी ड्यूटी तो निभाते ही हैं और साथ ही वह कक्षा 9वीं के छात्रों को गणित भी पढ़ाते हैं।

फिजिक्स में ली है मास्टर डिग्री

डिप्टी डीईओ सुधीर कालरा ने बताया कि, पेशे से चपरासी कमल ने फिजिक्स में मास्टर्स डिग्री ली है। जब अकेले गणित के टीचर पर काम का भार ज्यादा बढ़ गया था, तो कमल खुद प्रिंसिपल के पास गए और उन्होंने बच्चों को गणित पढ़ाने की मांग की। फिर कमल ने टीचर के आने तक बच्चों की क्लास लेनी शुरू कर दी।

हफ्ते में 17-18 क्लासेज लेते हैं कमल

सुधीर कालरा ने कहा कि, ‘कमल ने बेहद अच्छी तरह पढ़ाया और छात्रों को उनकी क्लास भी अच्छी लगी। जब गणित के शिक्षक वापस आए, तो कमल ने उनके काम का बोझ कम करने के लिए सप्ताह में 17-18 क्लासेज पढ़ाने की पेशकश की।’

कमल के पास जिम्मेदार शिक्षक के गुण

हरियाणा सरकार के एक मंत्री ने कमल पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि, ‘कमल एमएससी हैं, लेकिन वह छात्रों को पढ़ाने के लिए योग्य नहीं हैं। सरकारी मानदंडों के अनुसार, कक्षा 9 से 12 के छात्रों को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक के पास संबंधित विषय में एमए की डिग्री होनी चाहिए।’ इसके बाद डिप्टी डीईओ ने कमल की तारीफ करते हुए कहा कि, ‘हमें उसके सकारात्मक पक्ष को देखना चाहिए। वह अपने कर्तव्य की से परे जा रहा है। वह घंटी बजाता है, कर्मचारियों को पानी देता है और फिर छात्रों को पढ़ाता है। उनके पास एक जिम्मेदार शिक्षक के गुण हैं।’

चर्चा में रही थी ग्रुप-D की भर्ती

गौरतलब है कि हरियाणा में ग्रुप-D की भर्ती काफी चर्चा में रही थी। इसमें पढ़े-लिखे युवा चतुर्थ श्रेणी में भर्ती होकर सेवा दे रहे हैं। जब हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर से राज्य में रोजगार की स्थिति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि, ‘हम एक शिक्षित व्यक्ति को चपरासी की नौकरी के लिए आवेदन करने से नहीं रोक सकते, लेकिन मैं आपको आश्वासन दे सकता हूं कि ग्रुप-डी नौकरियों में केवल 10-12% उच्च शिक्षित युवा हैं। लेकिन यह सरकार की एक उपलब्धि है, क्योंकि जिन लोगों को ऐसे पदों पर चुना गया, उनमें से कई बाद में उच्च पदों के लिए आवेदन करते हैं।’

Related posts