दोस्त को कुलपति बनाने के लिए विंग कमांडर ने अमित शाह बनकर की मप्र के राज्यपाल से बात, दो गिरफ्तार

kuldeep vaghela

चैतन्य भारत न्यूज

भोपाल. मध्यप्रदेश पुलिस की विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने शुक्रवार को भारतीय वायु सेना के एक विंग कमांडर और उसके एक डॉक्टर मित्र को गिरफ्तार किया है। दरअसल अपने एक दोस्त को मध्यप्रदेश में आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय का कुलपति बनवाने के लिए विंग कमांडर ने राज्यपाल लालजी टंडन को सिफारिश के लिए कथित तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बनकर फोन किया। संदेह होने के बाद राजभवन की शिकायत के आधार पर एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।


राज्यपाल को दिया आदेश

आरोपी विंग कमांडर की पहचान कुलदीप वाघेला के रूप में हुई है। वह फिलहाल भारतीय वायु सेना के मुख्यालय, दिल्ली में पदस्थ है। जबकि उनका मित्र डॉ. चंद्रेश कुमार शुक्ला भोपाल का निवासी है और वह डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया का मप्र सदस्य भी है। जानकारी के मुताबिक, फोन पर वाघेला ने राज्यपाल लालजी टंडन को आदेशात्मक लहजे में अपने मित्र चंद्रेश कुमार शुक्ला को जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय का कुलपति बनाने को कहा।

राज्यपाल को आवाज पर हुआ शक

जानकारी के मुताबिक, जब राज्यपाल को आवाज और बात करने के लहजे पर संदेह हुआ तो उन्होंने इसकी जानकारी स्टाफ को दी। फिर राज्यपाल के स्टाफ ने गृह मंत्री के दिल्ली स्थित दफ्तर और निवास से ऐसी किसी फोन कॉल की जानकारी ली, जिसके बाद पता चला कि गृह मंत्री ने ऐसा कोई फोन कॉल किया ही नहीं। 8 जनवरी को राज्यपाल द्वारा एक लिखित शिकायत मध्य प्रदेश एसटीएफ को दी गई। इसके बाद एसटीएफ ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की और कुलदीप वाघेला व चंद्रेश कुमार शुक्ला को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने धोखाधड़ी और प्रतिरूपण का केस दर्ज कर दोनों को तीन दिन की रिमांड पर लिया है।

ऐसे की नकली फोन कॉल की प्लानिंग

एसटीएफ एडीजी अशोक अवस्थी ने बताया कि, ‘जबलपुर के मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में कुलपति पद के लिए कई लोगों ने बायोडाटा दिए थे। चयन के लिए सर्च कमेटी ने इंटरव्यू भी लिए थे। इसमें डेंटल सर्जन डॉ. चंद्रेश कुमार शुक्ला भी शामिल थे। चयन प्रक्रिया के बीच शुक्ला ने अपने मित्र कुलदीप वाघेला से चर्चा की। शुक्ला ने वाघेला को कहा कि, कुलपति बनने के लिए किसी बड़े व्यक्ति से फोन कराना पड़ेगा। फिर दोनों के बीच अमित शाह से राज्यपाल की बात कराना तय हुआ। बाद में दोनों ने खुद अमित शाह बनकर राज्यपाल से बात करने की साजिश रची।

वाघेला की गिरफ्तारी में कई घंटे लगे

मामले की सच्चाई सामने आने के बाद एसटीएफ ने वाघेला की गिरफ्तारी के लिए अपनी टीम दिल्ली भेजी, लेकिन वहां उसे पकड़ने के लिए कई घंटे लगे। वाघेला की गिरफ्तारी में सेना के उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद एसटीएफ की टीम उसे भोपाल लाई, जिसमें कई घंटों का समय लग गया।

भोपाल राजभवन में रह चुका है तैनात

एसटीएफ एडीजी के मुताबिक, कुलदीप वाघेला पहले मध्य प्रदेश के पूर्व राज्यपाल स्व. रामनरेश यादव के निवास पर तैनात रह चुका है। 2014 में उसकी पोस्टिंग राजभवन में थी और इस दौरान ही उसकी चंद्रेश शुक्ला से मुलाकात हुई थी। इसलिए वाघेला को जानकारी थी कि फोन पर राज्यपाल से बात कैसे हो पाएगी और इसी का उसने फायदा उठाने की कोशिश की लेकिन वे कामयाब नहीं हो सके।

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