भगवान शिव के अंतिम ज्योतिर्लिंग के दर्शन से पूरी होती है संतानप्राप्ति की मनोकामना, जानिए इसका महत्व और विशेषता

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चैतन्य भारत न्यूज

सावन के महीने में भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। इस महीने में शिवभक्त भोले बाबा के प्रति अपना प्रेम और श्रद्धा व्यक्त करने के लिए अलग-अलग कार्य करते हैं। मान्यता है कि, सावन महीने में जो भी भक्त भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग का नाम जपता है उसके सातों जन्म तक के पाप नष्ट हो जाते हैं। इन्हीं में से एक है घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग जिसे प्रमुख माना गया है। आइए जानते हैं घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग की विशेषता के बारे में।

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व

grishneshwar jyotirlinga,grishneshwar jyotirlinga ka mahatv,grishneshwar jyotirlinga ki viseshtaभगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से अंतिम ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर है। यह ज्योतिर्लिंग बाकी ज्योतिर्लिंगों से छोटा है। शिवमहापुराण में भी घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग का उल्लेख है। मान्यता है कि घृष्णेश्वर में आकर शिव के इस स्वरूप के दर्शन से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इस मंदिर को ‘घुष्मेश्वर’ और ‘कुंकुमेश्वर’ के नाम से भी जाना जाता है। इस ज्योतिर्लिंग के पास ही एक सरोवर भी है जो शिवालय के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि ज्योतिर्लिंग के साथ जो भक्त इस सरोवर के भी दर्शन करते हैं, भगवान शिव उनकी सभी इच्छाएं पूर्ण करते हैं। शास्त्रों के मुताबिक, जिस दंपत्ती को संतान सुख नहीं मिल पाता है उन्हें यहां आकर दर्शन करने से संतान की प्राप्ति होती है।

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग की विशेषता

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हर साल यहां सावन माह के दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। आम दिनों में भी यहां भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं। 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा का समापन इस अंतिम ज्योतिर्लिंग से होता है। इस मंदिर के तीन द्वार हैं। मुख्य मंदिर से पहले कोकिला मंदिर है। इस मंदिर के आस-पास कई अन्य मंदिर भी हैं। भगवान शिव का पिण्ड पूर्व दिशा की तरफ है। इस मंदिर का निर्माण 24 खम्बों के द्वारा हुआ है। इन खम्बों पर बहुत ही सुन्दर कलाकारी है। यह मंदिर शिल्पकला के लिए भी प्रसिद्द है।

कैसे पहुंचे घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग

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यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र राज्य के औरंगाबाद के पास दौलताबाद से 11 किलोमीटर की दूरी पर वेरुलगांव के पास स्थित है। आप घृष्णेश्वर तक पहुंचने के लिए औरंगाबाद और दौलताबाद जैसे यातायात केंद्रों से बस या टैक्सी की सुविधा ले सकते हैं। यदि आप ट्रेन के जरिए यात्रा करना चाहते हैं तो आपके लिए औरंगाबाद नजदीकी रेलवे स्टेशन है। यहां उतरकर आप यातायात के दूसरे साधन को लेकर घृष्णेश्वर मंदिर पहुंच सकते हैं।

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