गुड़ी पड़वा पर्व आज, जानिए क्यों और कैसे मनाया जाता है यह त्योहार

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चैतन्य भारत न्यूज

चैत्र नवरात्रि से हिंदुओं का नव वर्ष भी शुरू हो जाता है जिसे गुड़ी पड़वा के नाम से जाना जाता है। चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी पड़वा का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन को नवसंवत्सर के रुप में पूरे देश भर में मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इस पर्व को लेकर खास मान्यताएं हैं। इस साल गुड़ी पड़वा का पर्व 25 मार्च को मनाया जाएगा।



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क्या होता है गुड़ी पड़वा?

गुड़ी ध्वज यानि झंडे को कहा जाता है और पड़वा, प्रतिपदा तिथि को। मान्यता है के इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण कार्य शुरू किया था।ये भी कहा जाता है कि, इस दिन भगवान श्री राम ने दक्षिण में लोगों को बाली के अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इसी खुशी में हर घर में गुड़ी यानि कि विजय पताका फहराई गई। यह परंपरा कई स्थानों पर आज तक जारी है।

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कैसे मनाया जाता है गुड़ी पड़वा?

  • सुबह स्नान आदि के बाद गुड़ी को सजाया जाता है।
  • सूर्योदय के तुरंत बाद गुड़ी की पूजा का विधान है।
  • चटख रंगों से रंगोली बनाने के साथ ही फूलों से घर को सजाया जाता है।
  • इस दिन आमतौर पर मराठी महिलाएं नौवारी (9 गज लंबी साड़ी) पहनती हैं और पुरुष केसरिया या लाल पगड़ी के साथ कुर्ता-पजामा या धोती-कुर्ता पहनते हैं।
  • इस दिन नए वर्ष का भविष्यफल सुनने-सुनाने की भी परंपरा है।
  • गुड़ी पड़वा पर श्रीखंड, पूरन पोली, खीर आदि बनाए जाते हैं।
  • शाम के समय लोग लेजिम नामक पारंपरिक नृत्य भी करते हैं।

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