गर्भपात का स्टिंग करने गर्भवती बनकर पहुंचीं डिप्टी कलेक्टर, डॉक्टरों ने की हड़ताल

चैतन्य भारत न्यूज

ग्वालियर. डिप्टी कलेक्टर दीपशिखा भगत ने मरीज बनकर शनिवार सुबह गर्भपात व भ्रूण परीक्षण के धंधे का स्टिंग किया। वह गजराराजा मेडिकल कॉलेज में गायनिक विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रतिभा गर्ग की सिटी सेंटर स्थित गर्ग मदर एंड चाइल्ड केयर क्लीनिक पहुंचीं। यहां उन्होंने खुद को गर्भवती बताकर भ्रूण परीक्षण कराने का सौदा किया। जैसे ही उनके और डॉक्टर के बीच दस हजार रुपए में सौदा तय हुआ तो डिप्टी कलेक्टर ने अपनी असली पहचान दिखाते हुए पुलिस बुला ली।

जानकारी के मुताबिक, पहले डिप्टी कलेक्टर भगत जयारोग्य अस्पताल पहुंची थीं। यहां आईसीयू में उन्हें एक नर्स मिली, जिससे डिप्टी कलेक्टर ने कहा कि, वह गर्भपात कराना चाहती है। फिर नर्स ने कहा कि वह एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रतिभा गर्ग की क्लीनिक पर चली जाएं। शनिवार की दोपहर करीब 12 बजे डिप्टी कलेक्टर डॉ. प्रतिभा की क्लीनिक पर पहुंचीं। उन्होंने डॉक्टर को बताया कि, उनको दो माह का गर्भ है, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह इस संतान को जन्म नहीं देना चाहती हैं। फिर डॉक्टर ने उनको अल्ट्रासाउंड जांच लिखीं और साथ ही 10 हजार रुपए का खर्चा बताया। क्लीनिक से जांच करवाने का कहकर निकलीं डिप्टी कलेक्टर करीब एक घंटे बाद पुलिस फोर्स के साथ क्लीनिक पर पहुंचीं। लेकिन उस वक्त डॉ. प्रतिभा वहां मौजूद नहीं थी। फिर उनके पति ने फोन करके बुलाया। इसके बाद दोनों पति-पत्नी को विश्वविद्यालय थाने लाया गया। पुलिस ने उनकी क्लीनिक को भी सील कर दिया गया।

शाम करीब पांच बजे उनसे पूछताछ होती रही। लेकिन फिर भी जब उन्हें नहीं छोड़ा गया तो प्रतिभा के पति डॉ. प्रदीप गर्ग ने अपने व्हाट्सएप ग्रुप पर संदेश शहर के डॉक्टर व यूनियन को भेजा। इसके बाद थाने में डॉक्टरों की भीड़ जुट गई। यहां डॉक्टरों ने नारेबाजी करना शुरू कर दी। थाने पहुंचे सभी डॉक्टरों की सभी यूनियन के सदस्य जेएएच सहित सभी अस्पतालों में हड़ताल की तैयारी करने लगे। फिर पुलिस व प्रशासन ने डॉ. प्रतिभा को सिर्फ नोटिस देकर छोड़ दिया। इस नोटिस में उन्हें जांच के लिए 1 जुलाई को कलेक्ट्रेट के कमरा नंबर 206 में दोपहर 12 बजे आने की बात कही गई है।

डॉ.प्रवीण ने यह आरोप लगाया है कि डिप्टी कलेक्टर ने दो माह का गर्भ बताया था। उनका कहना है कि, ‘गर्भपात करना कोई अपराध नहीं है। फिर भी हमारे साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। डिप्टी कलेक्टर पुलिस फोर्स को लेकर हमारे घर पहुंची और मेरे तीनों फोन छीन लिए। फिर जब मैंने उनसे कहा कि बच्चे घर में अकेले हैं, एक मोबाइल तो चालू रहने दो तो उन्होंने हमसे कहा कि यह हमारी जिम्मेदारी नहीं है।’ डॉ. प्रवीण ने कहा, ‘यदि हमने कुछ गलत किया तो हमारे खिलाफ एफआईआर दर्ज करना चाहिए थी। 8.41 घंटे थाने में क्यों बैठाकर हमारी प्रतिष्ठा धूमिल की गई। हम डॉक्टर हैं, कोई अपराधी नहीं हैं।’

डॉक्टरों को यह स्टिंग नागवार गुजरा है। इसी कारण वह हड़ताल पर चले गए। डॉक्टरों का कहना है कि, अगर डॉ. प्रतिभा ने कोई गलत काम किया होता तो पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई करती। लेकिन यह मामला झूठा व मनगढ़ंत था इसलिए जांच के नाम पर महिला डॉक्टर को 9 घंटे थाना परिसर में बैठाकर और उन्हें यातनाएं देकर रात में सिर्फ नोटिस देकर छोड़ दिया गया। रविवार को डॉक्टरों की हड़ताल के कारण सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों को उपचार नहीं मिल पाया। हालांकि, उन्होंने इमरजेंसी सेवा उपलब्ध कराने की बात कही है।

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