जन्मदिन विशेष : ऐसा रहा ‘सुपरमॉम’ मैरी कॉम का सफर, जानिए उनसे जुड़ी खास बातें और उपलब्धियां

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चैतन्य भारत न्यूज

वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में 8 बार की गोल्ड विजेता मैरी कॉम का आज 37वां जन्मदिन है। साल 2014 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बनीं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं मैरी कॉम के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें…



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1 मार्च, 1983 मैरी कॉम का जन्म मणिपुर के चुराचांदपुर में एक गरीब परिवार में हुआ था। मैरी कॉम का पूरा नाम मैंगटे चंग्नेइजैंग मैरी कॉम है। जब मैरी कॉम का रुझान बॉक्सिंग की तरफ बढ़ने लगा तो सबसे पहले इसका विरोध उनके घरवालों ने ही किया। उन्हें कहा गया कि यह खेल ‘महिलाओं के लिए’ नहीं है। जब मैरी की एक जीत से जुड़ी खबर अखबार में छपी, तो उनके पिता ने उनकी खूब डांट लगाई थी।

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मैरी कॉम को बचपन से ही खेल कूद का बहुत शौक था, लेकिन बॉक्सिंग के प्रति उनका रुझान तब बढ़ा, जब उन्होंने स्पो‌र्ट्स कॉम्प्लेक्स में कुछ लड़कियों को बॉक्सिंग रिंग में दांव-पेंच करते देखा। मैरी कॉम ने अपनी बॉक्सिंग ट्रेनिंग के लिए अपना घर 15 साल की उम्र में ही छोड़ दिया और फिर वह ट्रेनिंग के लिए मणिपुर की राजधानी इम्फाल आ गईं। यहां स्पोर्ट्स एकेडमी में रहकर उन्होंने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ बॉक्सिंग के हुनर को धार दी। राष्ट्रिय बॉक्सिंग चैंपियनशिप के अलावा मैरी कॉम अकेली ऐसी महिला मुक्केबाज हैं, जिन्होंने अपनी सभी 8 विश्व प्रतियोगिताओं में पदक जीता है।

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खास बात यह है कि मैरी कॉम न केवल एक एथलीट है बल्कि सुपर मॉम भी है जिन्होंने बच्चों को जन्म देने के बाद न केवल उनकी मां को रोल अदा किया बल्कि एक सच्चे एथलीट का पहचान दिखाते हुए एक साल के अंदर ही खुद को रिंग के लिए भी तैयार किया। मैरी कॉम को ‘सुपरमॉम’ के नाम से भी जाना जाता हैं। विश्व स्तर पर 8 मेडल जीतने के साथ मैरीकॉम ने कई अन्य पुरस्कार भी हासिल किए। साल 2003 में अर्जुन पुरस्कार, 2006 में पद्मश्री पुरस्कार, 2009 में राजीव गांधी खेल रत्न, 2013 में तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्मभूषण पुरस्कार से नवाजा गया।

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इसके अलावा मैरी कॉम ने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स और पोलैंड में हुए ओपन बॉक्सिंग टूर्नामेंट में भी गोल्ड मेडल जीता था। साथ ही उन्होंने ओलंपिक गेम्स 2012 में ब्रॉन्ज, बुल्गारिया में हुए स्ट्रैंडजॉ मेमोरियल में सिल्वर मेडल, 2001 में हुए महिला वर्ल्ड चैंपियनशिप के पहले संस्करण में सिल्वर मेडल हासिल किया था।

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साल 2005 में उनकी शादी ओनलर कॉम से हुई, उसके बाद 2007 में उनके जुड़वां बच्चे हुए। बच्चे होने के बाद भी उनका खेल के प्रति प्रेम कम नही हुआ था, इसके एक साल बाद ही 2008 में उन्होंने मैग्नीफिशेंट मैरीकॉम की उपाधि से नवाजा गया। कहा जाता है कि मैरीकॉम के घरवाले उनकी शादी के खिलाफ थे क्योंकि उन्हें लगता था कि शादी के बाद वह घर पर बैठ जाएगी, साथ ही समाज क्या कहेगा लेकिन शादी के बाद एकदम इसका उल्टा हुआ। शादी के बाद मैरीकॉम ने बॉक्सिंग छोड़ी नहीं, बल्कि उनके ससुराल ने उनका पूरा साथ दिया।

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शादी के बाद साल 2005 में उन्होंने रूस में आयोजित हुए विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर सबको गलत साबित कर दिया। गौरतलब है कि, मैरीकॉम पर फिल्म भी बन चुकीं है जो साल 2014 में सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई थी। फिल्म में अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने मैरी कॉम का किरदार निभाया था।

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