जन्मदिन विशेष: अजय सिंह बिष्ट कैसे बने योगी आदित्यनाथ, 26 की उम्र में सांसद बनकर लोकसभा पहुंचे थे

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चैतन्य भारत न्यूज

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आज 48वां जन्मदिन है। उत्तराखंड के एक सामान्य परिवार में जन्म लेने और एक संत के रूप में जीवन बिता चुके योगी आदित्यनाथ बीजेपी के फायरब्रैंड और हिंदुत्व चेहरे के रूप में जाने जाते हैं। योगी को प्रदेश की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिना जाता है।

उत्तराखंड में हुआ जन्म 

योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में हुआ था। उनका असल नाम अजय सिंह बिष्ट है। योगी आदित्यनाथ ने गणित में बीएससी की पढ़ाई पूरी की है। शिक्षा के दौरान ही योगी ने राम जन्मभूमि आंदोलन के सदस्य के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की और इसी दौरान गोरखपुर में उनका परिचय गोरक्षपीठ के महंत अवैद्यनाथ से हुआ। महंत अवैद्यनाथ को यूपी की सियासत के रसूखदार चेहरों में से एक माना जाता था और पूर्वांचल की राजनीति पर भी उनका खास प्रभाव था। अवैद्यनाथ ने योगी की राजनीतिक क्षमता को भांपते हुए उन्हें अपना शिष्य बना लिया और फिर अजय सिंह बिष्ट का नाम परिवर्तित कर उन्हें योगी आदित्यनाथ के रूप में नई पहचान दी।

अवैद्यनाथ ने आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया

अवैद्यनाथ ने 1998 में राजनीति से संन्यास लिया तो योगी आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।योगी आदित्यनाथ जब 12वीं लोकसभा में सांसद बनकर पहुंचे तब उनकी उम्र मात्र 26 साल थी। इसलिए उनका नाम लोकसभा में पहुंचने वाले सबसे कम उम्र के सांसदों की सूची में भी शामिल है। इसके बाद आदित्यनाथ 1999, 2004, 2009 और 2014 में भी लगातार सांसद चुने जाते रहे। योगी आदित्यनाथ भाजपा के सांसद होने के साथ-साथ हिंदू युवा वाहिनी के संस्थापक भी हैं। 2015 में 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला था। 2017 में विधानसभा चुनाव में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने योगी आदित्यनाथ से पूरे राज्य में प्रचार कराया था।

लोकप्रिय स्टार प्रचार की तरह बनी पहचान

19 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश के बीजेपी विधायक दल की बैठक में योगी आदित्यनाथ को विधायक दल का नेता चुनकर मुख्यमंत्री का ताज सौंप दिया गया। खास बात यह की 2017 के बाद देश के अलग-अलग राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान योगी एक प्रमुख स्टार प्रचारक के रूप में तूफानी दौरे और सभाएं करते रहे। इसके अलावा पीएम मोदी के बाद तमाम राज्यों में प्रचारकों के रूप में योगी की खास लोकप्रियता भी देखने को मिली। 47 साल के कालखंड में योगी ने सियासत के कई कीर्तिमान स्थापित किए तो कई बार उनका नाम विवादों से भी जुड़ा। कभी शहरों के नाम बदलने और कभी इमारतों के रंग को भगवा करने को लेकर विपक्ष ने योगी पर सवाल उठाए। हालांकि तमाम आलोचनाओं के बावजूद योगी ने खुद को देश के एक ऐसे हिंदुत्व ब्रैंड के रूप में प्रशस्त जरूर किया, जिसे अब देश की सियासत के तेज-तर्रार चेहरों में से एक माना जाता है।

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