Father’s Day 2020: फादर्स डे को मनाने के लिए पूरी दुनिया से लड़ गई थी यह 16 साल की बेटी, ऐसे हुई इस दिवस की शुरुआत

चैतन्य भारत न्यूज

मां यदि हमें इस दुनिया में लाती हैं तो पिता वो है जो इस दुनिया में आगे बढ़ने के लिए हमारे लिए राह बनाते हैं। माता-पिता दोनों ही हमारे जीवन का जरूरी हिस्सा हैं। इसलिए हर वर्ष जून महीने के तीसरे रविवार को मनाया जाता ‘पितृ दिवस’ (Fathers Day) मनाया जाता है। भले ही एक पिता अपने प्यार का इजहार बच्चे से न करे लेकिन हर पल साये की तरह वो उसके पीछे खड़े होकर सहारा देते हैं।

फादर्स डे का इतिहास

फादर्स डे मनाने की शुरुआत सबसे पहले अमेरिका से हुई थी। इस दिवस को मनाने के लिए एक बेटी ने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी। इस खास दिन की प्रेरणा साल 1909 में मदर्स डे से मिली थी। वॉशिंगटन के स्पोकेन शहर में सोनोरा डॉड ने अपने पिता की स्मृति में इस दिन की शुरुआत की थी। इसके बाद साल 1916 में अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने इस दिवस को मनाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी। राष्ट्रपति कैल्विन कुलिज ने साल 1924 में इसे राष्ट्रीय आयोजन घोषित किया। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने पहली बार साल 1966 में इस खास दिन को जून के तीसरे रविवार को मनाए जाने का फैसला किया।

ये है कहानी

जब सोनोरा 16 साल की थी तब उसकी मां उसे और उसके 5 छोटे भाइयों को छोड़कर चली गईं थी। इसके बाद पूरे घर और बच्चों की जिम्मेदारी सोनोरा के पिता पर आ गई थी। एक दिन सोनोरा ने 1909 में मदर्स डे के बारे में सुना और उसे महसूस हुआ कि पिता के लिए ऐसा एक दिवस होना चाहिए। इसलिए सोनोरा ने फादर्स डे मनाने के लिए याचिका दायर की। इस याचिका में सोनोरा ने कहा कि उसके पिता का जन्मदिन जून में आता है और इसलिए वह चाहती है कि जून में ही फादर्स डे मनाया जाए। इस याचिका के लिए उसे दो हस्ताक्षरों की जरूरत थी। इसलिए वह आस-पास मौजूद सभी चर्च के सदस्यों के पास गई और उन्हें हस्ताक्षर करने के लिए मनाया। हालांकि, सोनोरा का किसी ने साथ नहीं दिया लेकिन सोनारा ने भी फादर्स डे मनाने की ठान ली थी। इसके लिए सोनोरा ने यूएस तक में कैंपेन किया और इस तरह पहली बार साल 1910 में फादर्स डे मनाया गया। धीरे-धीरे फादर्स डे मनाने का ट्रेंड पूरी दुनिया में फैला। अब हर घर में हर फादर्स डे बहुत ही प्यार के साथ मनाया जाता है।

बिन बताए वो हर बात जान जाते है,
मेरे पापा मेरी हर बात मान जाते है।

असमंजस के पलों में अपना विश्वास दिलाया,
ऐसे पिता के प्यार से बड़ा कोई प्यार ना पाया।

मंजिल दूर और सफर बहुत है,
छोटी सी जिंदगी की फिक्र बहुत है,
मार डालती यह दुनिया कब की हमें,
लेकिन “पापा” के प्यार में असर बहुत है।

मुझे मोहब्बत है,
अपने हाथ की सब उंगलियों से,
ना जाने किस उंगली को पकड़ के
पापा ने चलना सिखाया होगा।

मेरा साहस
मेरा सम्मान है पिता,
मेरी ताकत
मेरी पहचान है पिता।

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