सरकार ने कोरोना के डेल्‍टा प्‍लस वैरिएंट को ‘वैरिएंट ऑफ कंसर्न’ घोषित किया, WHO ने बताया है सबसे घातक

चैतन्य भारत न्यूज

भारत में जहां कोरोना महामारी की दूसरी लहर की रफ्तार अब कम होती दिखाई दे रही है तो वहीं इस वायरस के डेल्टा वैरिएंट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कोरोना वायरस के नए ‘डेल्टा प्लस वैरिएंट’ को केंद्र सरकार ने ‘वैरिएंट ऑफ कंसर्न’ यानी चिंताजनक घोषित कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि डेल्टा प्लस वैरिएंट देश में कोरोना की तीसरी लहर का कारण बन सकता है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश में डेल्टा प्लस वैरिएंट के अब तक 22 मरीज मिल चुके हैं। डेल्टा प्लस वैरिएंट को लेकर महाराष्ट्र, केरल और मध्य प्रदेश के लिए एडवाइजरी जारी की है। इन राज्यों को तत्काल रोकथाम के उपाय करने, उन्नत परीक्षण, ट्रैकिंग और टीकाकरण उन जिलों और समूहों में करने को कहा गया है।

बेहद संक्रामक हैडेल्टा प्लस वैरिएंट

एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने बातचीत में डेल्टा प्लस को वैरिएंट ‘बेहद संक्रामक’ बताया है। उनका कहना है कि, ‘ये इतना संक्रामक है कि अगर आप इस वैरिएंट से संक्रमित किसी कोरोना मरीज के बगल से बगैर मास्क के गुजरते हैं तो आप भी संक्रमित हो सकते हैं।’ उनका कहना है कि, ‘कोविड प्रोटोकॉल का पालन कर इससे काफी हद तक बचा जा सकता है। अब इस बारे में पता लगाया जा रहा है कि वैक्सीन इस वैरिएंट के खिलाफ असरदार है या नहीं।’

देश में अब तक 22 मरीज मिल चुके

स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि देश में डेल्टा प्लस वैरिएंट के अब तक 22 मरीज मिल चुके हैं। मंत्रालय ने इसे लेकर महाराष्ट्र, केरल और मध्य प्रदेश को पत्र भी लिखा है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि डेल्टा वैरिएंट 80 देशों में और डेल्टा प्लस वैरिएंट भारत के अलावा 9 देशों में है। अमेरिका, ब्रिटेन, पुर्तगाल, स्विट्जरलैंड, चीन, नेपाल, रूस और जापान में भी डेल्टा प्लस वैरिएंट मिले हैं।

क्या है डेल्टा प्लस वैरिएंट?

अब बात करते हैं डेल्टा प्लस वैरिएंट की। यह डेल्टा वैरिएंट के रूप में हुए बदलावों की वजह से बना है। डेल्टा वैरिएंट यानी B.1.617.2 जो कि पहले भारत में मिला था। फिर बाद के महीनों में यह दूसरे कई देशों में भी पाया गया। कोरोना के डेल्टा प्लस वैरिएंट में इसके स्पाइक प्रोटीन में K417N बदलाव हुआ है। डेल्टा प्लस वैरिएंट को पहले B.1.617.2.1 कहा जाता था। यह सबसे पहली बार यूरोप में मिला था। स्पाइक प्रोटीन कोरोना वायरस का जरूरी हिस्सा है। इसकी वजह से ही वायरस मानव शरीर में घुसकर इंफेक्शन करता है।

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