हाई कोर्ट ने कहा- तलाक लिए बिना प्रेमी के साथ रहना व्यभिचार, कोर्ट ने महिला पर ठोका मोटा जुर्माना

court

चैतन्य भारत न्यूज

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक मामले में स्पष्ट किया है कि पति से शादी तोड़े बिना यानी कानूनी रूप से तलाक लिए बिना महिला का अपने प्रेमी के साथ रहना व लिव-इन रिलेशनशिप के लिए अनुबंध तैयार करना एक तरह का अपवित्र गठबंधन है। यह व्यभिचार है। जस्टिस मनोज बजाज की बेंच ने इस महिला को फटकार लगाते हुए उस पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। रोचक यह है कि याचिका महिला ने ही लगाई थी। सिरसा निवासी इस महिला राजबाला की शादी दिनेश कुमार से वर्ष 2011 में हुई थी। दोनों के दो बच्चे भी हैं।

महिला ने अपनी याचिका में बताया था कि उसकी शादी घरवालों ने बिना उसकी रजामंदी के कर दी थी। उसका पहले से ही लिव-इन पार्टनर के साथ प्रेम-प्रसंग चल रहा था। फिर भी उसने परिवार की इज्जत की खातिर शादी कर ली। महिला ने पति पर शराब पीने और ड्रग्स लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह अकसर झगड़ा करता रहता है। महिला ने कई बार शादी तोड़ने की कोशिश की लेकिन घरवालों ने हमेशा समझौता करवा दिया। इस साल दो अगस्त को उसने तंग आकर पति को छोड़ने का आखिरी फैसला कर लिया। माता-पिता ने इस बार भी आपत्ति जताई तो महिला अपने प्रेमी के साथ रहने लगी। यही नहीं महिला और उसके लिव-इन पार्टनर ने एक लिखित समझौता किया और कानूनी रूप से इसका अनुबंध (डीड) भी करवा लिया। अनुबंध 13 सितंबर को बनवाया गया।

अनुबंध में दोनों (महिला व लिव-इन पार्टनर)  ने यह घोषणा की कि वे भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ दुष्कर्म, घरेलू हिंसा या किसी अन्य वैवाहिक विवाद का मुकदमा नहीं करेंगे। हालांकि महिला ने हाई कोर्ट में इस अनुबंध को आधार बनाते हुए खुद व लिव-इन रिलेशनशिप पार्टनर की सुरक्षा की मांग की थी। महिला ने कोर्ट के समक्ष स्वीकार किया कि वह अब भी दिनेश की पत्नी तो है।

हाई कोर्ट ने कहा कि डीड बनवाने से लिव-इन रिलेशनशिप को वैध नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी पाया कि महिला के जीवन को कोई खतरा नहीं है। उसने अपने अपवित्र गठबंधन को विधिक आवरण प्रदान करने के लिए याचिका दायर की है। पीठ ने याचिका खारिज करते हुए महिला को 25 हजार रुपये का जुर्माना सिरसा जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण में जमा कराने का निर्देश दिया।

Related posts