भाजपा सांसद की संदिग्ध हालात में मौत, सरकारी आवास में फंदे पर लटका मिला शव, खुद को बताते थे मोदी का सुदामा

चैतन्य भारत न्यूज

मंडी/दिल्ली. हिमाचल प्रदेश के मंडी से बीजेपी सांसद रामस्वरूप शर्मा की संदिग्ध हालत में मौत हुई है। दिल्ली स्थित आरएमएल अस्पताल के नजदीक बने फ्लैट में सांसद का निवास है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उनके खुदकुशी की आशंका जताई जा रही है।

बीजेपी ने रद्द की बैठक

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, उन्हें सुबह तकरीबन 8।30 बजे सूचना मिली कि आरएमएल अस्पताल के पास गोमती अपार्टमेंट (एमपी फ्लैट) में बीजेपी सांसद रामस्वरूप शर्मा ने आत्महत्या कर ली है। मौके पर जब अधिकारी पहुंचे तो सांसद का शव फंदे से झूलता हुआ मिला। दरवाजा अंदर से बंद था। अभी आत्महत्या के पीछे की वजह साफ नहीं है। पुलिस जांच में जुट गई है। उनकी मौत की खबर के बाद केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर उनके दिल्ली स्थित आवास पर पहुंचे। उनके निधन के कारण आज होने वाली भाजपा संसदीय दल की बैठक रद्द कर दी गई है।

सांसद के स्टाफ ने बताई पूरी कहानी

दिल्ली पुलिस को बीजेपी सांसद रामस्वरूप शर्मा के स्टाफ ने बताया, ‘आज सुबह जब मैं कमरा खोलने गया तो वह अंदर से लॉक था, बार-बार आवाज लगाने के बाद भी कमरा नहीं खुला, फिर पुलिस को फोन किया गया, पुलिस के आने पर दरवाजा तोड़ा गया, इस दौरान सांसद का शव फंदे से लटक रहा था।’

RSS से भी जुड़े रहे

रामस्वरुप शर्मा हिमाचल प्रदेश के दिग्गज नेता थे। राम स्वरूप शर्मा 2019 के आम चुनाव में हिमाचल प्रदेश के मंडी से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। इससे पहले 2014 में भी वे मंडी से ही लोकसभा चुनाव जीते थे। राम स्वरुप शर्मा का जन्म 10 जून 1958 को हुआ था। वे हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की जोगिंदर नगर संसदीय लोकसभा सीट से सांसद थे। वे मंडी जिला BJP और बाद में हिमाचल प्रदेश राज्य भाजपा के आयोजन सचिव रहे थे। उन्होंने हिमाचल प्रदेश राज्य खाद्य और नागरिक आपूर्ति निगम के उपाध्यक्ष के रूप में भी काम किया था। वे RSS के सक्रिय सदस्य थे। उन्होंने 2014 में मंडी लोकसभा सीट जीती, जिसमें उन्होंने कांग्रेस की प्रतिभा सिंह के खिलाफ 39,796 वोटों के अंतर से जीत हासिल की।

बीमारी की वजह से डिप्रेशन में थे

रामस्वरूप शर्मा को हार्ट की दिक्कत थी। उनकी एंजियोप्लास्टी हुई थी। जानकारी के मुताबिक, उनके हार्ट में चार स्टेंट डाले गए थे। सूत्रों का कहना है कि वे अपनी इस बीमारी की वजह से कुछ दिनों से डिप्रेशन में थे। रामस्वरूप खुद को मोदी का सुदामा बताते थे। वे 1985 तक नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कार्पोरेशन (NHPC) में नौकरी की थी और कबड्डी के खिलाड़ी भी रहे।

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