आखिर कलाई पर क्यों बांधा जाता है कलावा ? जानिए इसका महत्व और फायदे

kalawa

चैतन्य भारत न्यूज

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ काम की शुरुआत में या फिर पूजा पाठ के दौरान कलावा बांधा जाता है। कलावा को मौली और रक्षासूत्र भी कहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं इसे क्यों बांधा जाता है? यदि नहीं तो आइए जानते हैं इसे बांधने का महत्व क्या है?

क्यों बांधा जाता है कलावा?

शास्त्रों के मुताबिक, कलावा या मौली बांधने की शुरुआत माता लक्ष्मी और राजा बलि ने की थी। माना जाता है कि कलाई पर इसे बांधने से जीवन में आने वाले संकट से रक्षा होती है। कहा जाता है कि, भगवान् इंद्र जब वृत्रासुर से युद्ध करने जा रहे थे तब इंद्राणी शची ने इंद्र की दाहिनी भुजा पर रक्षा-कवच के रूप में कलावा बांध दिया था और वे इस युद्ध में जीत गए थे। उसके बाद से ये रक्षा सूत्र बांधा जाता है। माना जाता है कि इस सूत्र में त्रिदेव, ब्रह्मा, विष्णु व महेश तथा तीनों देवियों लक्ष्मी, पार्वती व सरस्वती की कृपा प्राप्त होती है।

ये हैं कलावा बांधने के फायदे

  • मान्यता है कि, रक्षा सूत्र शत प्रतिशत कच्चे धागे, सूत की ही होनी चाहिए।
  • इस सूत्र को बांधने से शिव दुर्गुणों का विनाश करते हैं।
  • इस सूत्र को बांधने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है।
  • स्वास्थ्य के अनुसार रक्षा सूत्र बांधने से कई बीमारियां दूर होती है।
  • कलावा बांधने से ब्लड प्रेशर, हार्ट एटेक, डायबीटिज और लकवा जैसे रोगों से बचाव होता है।

 

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