CAA के तहत भगवान बालाजी भी मिले नागरिकता, चिल्कुर मंदिर के पुजारी ने रखी मांग

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चैतन्य भारत न्यूज

हैदराबाद. देश के कई राज्यों में लोग नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध कर रहे हैं। मुस्लिम समुदाय के लोग सरकार के इस नए कानून से नाराज हैं। जबकि केंद्र सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि इस बिल से भारतीय मुसलमानों को कोई खतरा नहीं है।



इसी बीच हैदराबाद के चिलकुर बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी सीएस रंगराजन ने भगवान को नागरिकता देने की मांग की है। पुजारी ने सीएए के तहत देवी-देवताओं को नागरिकता देने की मांग की है। रंगराजन का कहना है कि, ‘सीएए के जरिए भारत के हिंदू देवी-देवताओं को भी नागरिकता मिलनी चाहिए। जब सरकार बाहर से आए शरणर्थियों को नागरिकता दे सकती है तो हिंदू देवी-देवताओं को क्यों नहीं।’

रंगराजन विशेष रूप से तिरुमाला में वेंकटेश्वर स्वामी, सबरीमाला में अयप्पा स्वामी और केरल में पद्मनाभस्वामी जैसे हिंदू देवताओं को सीएए की धारा 5 (4) के तहत नागरिता देने की मांग कर रहे हैं। रंगराजन का मानना है कि, इन देवताओं को एक पुजारी, ट्रस्टी या किसी एग्जीक्यूटिव ऑफिसर द्वारा ही अदालत में पेश किया जा सकता है, इसलिए उन्हें अल्पसंख्यकों के रूप में ही गिना जाएगा।

सीएए क्या है?

नागरिकता (संशोधन) कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना की वजह से भारत आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों नागरिकता दी जाएगी। हालांकि शर्त यह है कि वह 6 साल से भारत में रह रहे हो। यानी जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आ गए हैं उन्हें भारत की नागरिकता दी जाएगी।

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