कानपुर पुलिस हत्याकांड: 50 घंटे में 5 गुना बढ़ा कातिल विकास दुबे पर इनाम, अब तक नहीं मिला कोई सुराग

चैतन्य भारत न्यूज

लखनऊ. 8 पुलिसकर्मियों की हत्या करने वाले विकास दुबे पुलिस की पहुंच से दूर जरूर है, लेकिन कुख्यात हीस्ट्री शीटर की गिरफ्तारी के लिए महकमे ने घेराबंदी तेज कर दी है। कभी 25 हजार का इनामी बदमाश आज 8 पुलिसवालों की हत्या कर ढाई लाख का इनामी हो गया है। यानी अब विकास दुबे के बारे में खबर देने वाले को ढाई लाख रुपए का इनाम दिया जाएगा ।

हत्या के वक्त 50 हजार रुपए का इनाम था

बता दें जिस वक्त शूटआउट हुआ था, उस समय विकास दुबे पर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित था। फिर इनाम बढ़कर एक लाख रुपए किया गया था। इसके बाद डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी ने विकास दुबे पर ढाई लाख रुपए का इनाम घोषित कर दिया।

पुलिस टीमें कर रही तलाश

विकास की तलाश में उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश और नेपाल में पुलिस टीमें तलाश कर रही हैं। उसकी गिरफ्तारी के लिए कानपुर मंडल की 60 और बाकी 30 टीमें लखनऊ स्तर से रवाना की गई हैं, जो बीहड़ों से लेकर नेपाल बॉर्डर पर कॉम्बिंग कर रही हैं। पुलिस ने विकास के पोस्टर भी नेपाल बॉर्डर और टोल प्लाजा पर चस्पा कराए हैं।

90 पुलिसवालों के मोबाइल जब्त

बता दें विकास को छुपाने में अब तक कई पुलिसकर्मी भी साथ दे चुके हैं। ऐसे में मामले की जांच कर रही एसटीएफ ने चौबेपुर के अलावा शिवली, शिवराजपुर और बिल्हौर थाने के 90 पुलिसकर्मियों के मोबाइल जब्त किए हैं। आईजी मोहित अग्रवाल ने बताया कि जो भी घर का भेदी होगी, उसके खिलाफ अपराधी जैसा बर्ताव होगा।

2017 में कर ली थी एनकाउंटर की तैयारी

हत्‍याकांड को अंजाम देकर वह अभी तक पुलिस की गिरफ्त से दूर है। सूत्रों के मुताबिक, अक्टूबर 2017 में लखनऊ पुलिस ने विकास के एनकाउंटर की तैयारी कर ली थी। उस वक्त उन्नाव की एक लेडी डॉन ने लखनऊ पुलिस को विकास के लखनऊ के कृष्णानगर में रहने की जानकारी दी थी, तब विकास दुबे पर 25 हजार का इनाम था। उस लेडी डॉन की जानकारी से पहले किसी को नहीं पता था कि विकास लखनऊ में रहता है।

पुलिसकर्मियों ने दिया विकास का साथ

विकास दुबे की लखनऊ में होने की सूचना पर पुलिस ने उसे ढेर करने का प्लान बनाया था, लेकिन इसी बीच एनकाउंटर की प्लानिंग लीक होकर एसटीएफ को मिल गई। उस वक्त कुछ पुलिसकर्मियों ने विकास का साथ दिया था। प्लानिंग लीक होने के बाद अक्टूबर 2017 में एसटीएफ ने विकास को एक 30 स्प्रिंगफील्ड राइफल के साथ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उस वक्त पुलिस को उसके पास 30 स्प्रिंगफील्ड राइफल बरामद हुई थी। पुलिस ने राइफल को जब्त कर लिया था, लेकिन अप्रैल 2018 में ये राइफल कोर्ट के आदेश पर रिलीज की गई थी।

क्या है पूरा मामला

बीते गुरुवार की रात को कानपुर देहात के बिकरू गांव में पुलिस ने विकास को पकड़ने के लिए दबिश दी थी। जैसे ही फोर्स गांव के बाहर पहुंची तो वहां जेसीबी लगा दी गई। इस वजह से फोर्स की गाड़ी गांव के अंदर नहीं जा सकी। इस वजह से पुलिस टीम को घर से कुछ दूर पहले अपनी गाड़ी को छोड़ना पड़ा। तभी पहले से ही घात लगाए बदमाशों ने फायरिंग करना शुरू कर दी। इस दौरान पुलिस की ओर से भी जवाबी फायरिंग की गई। लेकिन बदमाश ऊंचाई पर थे जिसके कारण वे बच गए। इस वजह से पुलिसकर्मियों को गोलियां लगी है। 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए।

कौन है विकास दुबे

विकास दुबे वही अपराधी है, जिसने 2001 में राजनाथ सिंह सरकार में मंत्री का दर्जा पाए संतोष शुक्ला की थाने में घुसकर हत्या की थी। हस्ट्रीशीटर विकास दुबे के खिलाफ 192 220,147 148 149 302 307 394 सहित कई अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज है।

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