बुरहान के बाद हिजबुल का दूसरा पोस्टर ब्वॉय था रियाज नायकू, आतंकी बनने से पहले था गणित का शिक्षक, क्रूरता के लिए था कुख्यात

चैतन्य भारत न्यूज

श्रीनगर. जम्मू कश्मीर में बुधवार को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में हिज्बुल मुजाहिदीन का एक शीर्ष कमांडर रियाज नायकू मारा गया। रियाज नायकू के रूप में एक खूंखार चेहरा सामने आया। अवंतीपोरा में पंजगाम के नायकू मोहल्ले का रहने वाला रियाज बुरहान वानी का बेहद करीबी थी। हिजबुल के लिए बुरहान के बाद नायकू की इस आतंकी तंजीम के लिए पोस्टर ब्वाय बना।

गलत परंपराएं शुरू की

रियाज ने कई गलत परंपराएं शुरू की थी। आतंकी पहले नागरिकों या फिर पुलिसकर्मियों को अपना निशाना नहीं बनाते थे लेकिन दो साल पहले उनका यह नियम टूट गया। अब आतंकियों ने न सिर्फ पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के घरों में घुसकर तोड़फोड़ की बल्कि उन्होंने उनके परिजनों को भी अगवा कर निशाना बना लिया। दक्षिण कश्मीर से दो दर्जन से ज्यादा पुलिसकर्मियों के परिजनों को अगवा किया गया।

दो साल स्कूल में गणित पढ़ाया

आतंकवाद की राह पर चलने से पहले रियाज गणित का अध्यापक था। रियाज 6 जून 2012 को हिजबुल में शामिल हुआ था। वह अपनी क्रूरता के कारण जल्द ही शीर्ष स्थान पर पहुंच गया। बुरहान के मारे जाने पर सब्जार भट को हिजबुल की कमान दी गई लेकिन वर्ष 2017 में त्राल में हुई मुठभेड़ में सब्जार मारा गया। हिजबुल ने सब्जार के मारे जाने पर पुराने और सक्रिय आतंकी अल्ताफ काचरू और सद्दाम पड्डर के बजाय जुलाई 2017 में नायकू को हिजबुल की कमान सौंप दी।

आंखों में तेजाब डालने का फरमान सुनाया

रियाज 1985 में कश्मीर के पुलवामा के बेगीपोरा गांव में पैदा हुआ था। उसके दोस्तों ने बताया कि, ‘हम उस समय हैरान रह गए थे जब उसने पंचायत चुनावों में भाग लेने वालों की आंखों में तेजाब डालने का फरमान सुनाया था।’
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि नायकू के खिलाफ 11 मामले दर्ज थे और उस पर 12 लाख रुपए का इनाम था। वह ज्यादातर अकेला ही रहता था और आतंकवादी संगठन के अंदर किसी पर भरोसा नहीं करता था।

नमाज पढ़ने के बहाने निकला और फिर कभी नहीं लौटा

रियाज के पिता अस्सदुल्ला ने बताया कि, 12वीं कक्षा में उसे अच्छे अंक मिले थे। वह हमेशा चुप रहता था। वह इंजीनियर बनना चाहता था लेकिन बाद में उसका मन बदल गया। आतंक की राह पर चलने से पहले उसने एक निजी स्कूल में करीब दो साल गणित पढ़ाया है। साल 2010 में जब मच्छल मुठभेड़ को लेकर प्रदर्शन हो रहा था तो रियाज ने भी उस प्रदर्शन में हिस्सा लिया। फिर वह पुलिस की गिरफ्त में आ गया। 2012 में जब वह रिहा हुआ तब तक रियाज पूरा बदल चुका था। उसके भीतर जिहादी मानसिकता भर चुकी थी। उसके पिता ने बताया कि, रियाज ने भोपाल की एक यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने के लिए उनसे सात हजार रुपए लिए थे। फिर 21 मई 2012 को वह नमाज पढ़ने का कहकर घर से निकला और कभी नहीं लौटा। 6 जून को उन्हें पता चला कि रियाज आतंकी संगठन हिजबुल में शामिल हो गया है।

प्रेमिका से मिलने आया, तब भी बच निकला

रियाज के इलाके की ही एक युवती से कई सालों से प्रेम प्रसंग चल रहा था। एक बार जब वह प्रेमिका से मिलने आया था तो सुरक्षाबालों को उसकी जानकारी मिल गई। उसे पकड़ने के लिए घेराबंदी भी की गई लेकिन वह बच निकला। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि, रियाज सोशल मीडिया का भी खूब इस्तेमाल करता था। कश्मीर में पांव पसार रहे एजीएच और इस्लामिक स्टेट (IS) जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ भी उसने पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के आदेश पर जंग का ऐलान कर दिया था।

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