होली 2020: राजस्थान के इस गांव में खेली जाती है पत्थरमार होली, सालों पुरानी है परंपरा

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चैतन्य भारत न्यूज

होली का त्‍योहार मान्‍यताओं और परंपराओं का संगम है। देशभर में इस द‍िन को पूरे जोश और खुश‍ियों के साथ मनाते हैं। कहीं फूलों की होली होती है तो कहीं लट्ठ बरसाए जाते हैं। लेकिन आज हम आपको बताएंगे एक ऐसी अनोखी होली के बारे में जहां पत्थरों की होली खेली जाती है। जी हां… राजस्थान के बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में रंग-गुलाल नहीं बल्कि पत्थरों से होली खेली जाती है।



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ऐसे खेलते हैं पत्थरों से होली

गांव के चामुंडा देवी के मंदिर में चौक के अंदर एक समूह और दूसरा समूह बाहर रहता है। अंदर के लोग पत्थर बरसाते वहीं बाहर के लोग अंदर प्रवेश करने का प्रयास करते। पत्थरों की बारिश के बीच यदि कोई व्यक्ति अंदर प्रवेश कर लेता तो गेर संपन्न हो जाती। इस गेर में पत्थर बरसाने के कारण बड़ी संख्या में लोग घायल भी होते हैं। चोट लगे स्थान पर चामुंडा माता की भभूत लगा कर इलाज कर दिया जाता। ऐसी मान्यता ह कि भभूत लगाने से चोट जल्दी ठीक हो जाती है।

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कहा जाता है कि सदियों पहले आहोर के जागीरदार ने गांव के बहादुर युवाओं का चयन करने के लिए भाटा गेर की शुरुआत की थी। बाद में यह आहोर की परंपरा बन गई। जबकि आदिवासी क्षेत्र के बड़े बुजुर्गो के मुताबिक, सदियों पहले यहां के राजा ने एक व्यक्ति को होली के दिन मरवा दिया था। मृतक की पत्नी उसकी लाश को गोद में लेकर सती हो गई और मारते-मरते श्राप दे गई। उसने कहा कि होली के दिन यदि यहां मानव रक्त नहीं गिरेगा तो प्राकृतिक आपदा आएगी। बस इसी मान्यता के चलते ही यहां हर वर्ष होली पर पत्थर मार होली खेली जाती है।

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