अजब-गजब परंपरा: यहां होलिका दहन से पहले निकाली जाती है ‘हथौड़े की बारात’, कद्दू से कराई जाती है शादी

hathode ki barat

चैतन्य भारत न्यूज

प्रयागराज. आज तक आपने कई अलग-अलग तरह की बारात देखी होंगी लेकिन हम आपको आज एक ऐसी अनोखी बारात के बारे में बता रहे हैं जो इस समय चर्चा में बनी हुई है। इस बारात में दूल्हे को नहीं बल्कि उसकी जगह हथौड़े को सजाकर बारात निकली जाती है। यह परंपरा धर्म और सांस्कृतिक नगरी कही जाने वाले प्रयागराज में निभाई जाती है।


धूमधाम से निकलती है बारात

प्रयागराज में हर साल होलिका दहन होने की पूर्व संध्या पर शहर की सड़कों पर पूरे विधि विधान के बाद धूम-धाम के साथ हथौड़े की बारात निकाली जाती है। इस अनूठी परंपरा वाली शादी में दूल्हा होता है एक भारी-भरकम हथौड़ा। जैसे किसी दूल्हे राजा की धूमधाम से बारात निकलती है वैसे ही प्रयागराज की गलियों में हथौड़े की भी धूमधाम से बारात निकाली जाती है। बारात में सैकड़ों बाराती के साथ ही बैंड-बाजे भी होते हैं। बारात के आगे-आगे लोग नाचते-गाते हुए चलते हैं।

हजारों लोगों के बीच होता है हथौड़े और कद्दू का मिलन

जहां एक ओर दूल्हा बने हथौड़े की बारात बेहद भव्यता के साथ निकाली गई तो वहीं दुल्हन कद्दू का डोला बिना जोरों-शोरों व हंगामे के ही विवाह स्थल तक पहुंचाया गया और कद्दू भंजन हुआ। परंपरा के मुताबिक, हथौड़े और कद्दू का मिलन शहरभर के बीच हजारों लोगों की मौजूदगी में कराया जाता है। इस परंपरा का मकसद समाज में फैली कुरीतियों को पूरी तरह से खत्म करना है।

परंपरा के पीछे यह है वजह

बारात के आयोजकों ने बताया कि, ‘प्रलय काल के बाद भगवान विष्णु अक्षय वट की टहनी पर बैठे हुए थे। उन्होंने भगवान विश्कर्मा को बुलाया और कहा अब प्रलयकाल खत्म हो गया है इसलिए विश्व निर्माण होना चाहिए। विश्कर्मा जी ने हवन और यज्ञ किया। लंबे समय तक हवन करने बाद एक यंत्र पैदा हुआ जो हथौड़ा था। तब से ही प्रयागराज के लोग हथौड़े से प्रेम करने लगे। इस परंपरा के साथ ही प्रयागराज में रंगपर्व होली की शुरुआत हो जाती है।

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