स्पर्श ने सुनाई अपने संघर्ष की कहानी, डॉक्टर बोले थे- दो दिन भी नहीं जीऊंगा, आज गाता हूं, स्पीच भी देता हूं

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चैतन्य भारत न्यूज

अमेरिका में पीएम नरेंद्र मोदी के ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में व्हीलचेयर पर राष्ट्रगान गा रहे स्पर्श शाह की बुलंद आवाज आपने जरूर सुनी होगी। स्पर्श पीएम मोदी से मिलने को लेकर काफी उत्साहित थे। स्पर्श न केवल अच्छे सिंगर हैं बल्कि मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं, जो अमेरिका के न्यू जर्सी में रहते हैं।



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स्पर्श जन्म से ही ऑस्टो-जेनेसिस बीमारी से जूझ रहे हैं। इस बीमारी में हड्डियां इतनी कमजोर होती हैं कि हल्के दबाव से टूट जाएं। जब स्पर्श पैदा हुए थे, तब उनकी 45 हड्डियां टूटी हुई थीं। उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों ने परिवार से यहां तक कह दिया था कि यह बच्चा दो दिन से ज्यादा नहीं जी पाएगा।

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हाल ही में हुए एक इंटरव्यू में स्पर्श ने बताया कि, ‘जन्म के बाद शुरू के 6 महीने वे आईसीयू में रहें। अगले 6 महीने तक नाक में नली डालकर भोजन दिया गया। उनके पापा (हीरेन) तब केपीएमजी में नौकरी करते थे।’ उन्होंने बताया कि, ‘मेरी देखभाल के लिए उन्हें यह नौकरी छोड़नी पड़ी थी। इलाज पर करीब 3 करोड़ रुपए खर्च हुए। उधार चुकाने में उनके पिता को करीब 4 साल लग गए। इस दौरान मां (जिगिशा शाह) ने साथ दिया। गुजराती स्कूल से पढ़ी मम्मी को तब अंग्रेजी नहीं आती थी। उन्होंने न सिर्फ अंग्रेजी सीखी बल्कि आज वह दुनिया की टॉप रेटिंग एजेंसियों में से एक मूडीज में डायरेक्टर के तौर पर काम कर रही हैं।’

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इसके अलावा स्पर्श ने अपनी दिनचर्या के बारे में भी बताया। उन्होंने बताया कि, ‘मेरा दिन सुबह 6.30 बजे शुरू हो जाता है। पूरे घर में राफ्ट लगे हैं, ताकि व्हीलचेयर पर एक जगह से दूसरी जगह जाने में आसानी हो। बस से स्कूल जाता हूं और आम बच्चों साथ पढ़ता हूं। स्कूल से लौटने के बाद पियानो क्लास लेता हूं। फिर शाम को होमवर्क करता हूं। इसमें मम्मी-पापा मदद करते हैं, क्योंकि किताब-कॉपी उठाने या ज्यादा जोर देकर कलम चलाने में हड्डियां टूट जाने का डर बना रहता है।

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वहीं स्पर्श के पिता ने बताया कि, साढ़े तीन साल की उम्र में स्पर्श पियानो बजाना सीखने लगा था। 10 साल की उम्र में वह रैप गाने लगा और 13 की उम्र में उसने टेड टॉक में इतनी जुझारू मोटिवेशनल स्पीच दी कि अब तक इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उसकी स्पीच को ढाई करोड़ बार सुना जा चुका है। हिरेन का कहना है कि याहू ने स्पर्श को दुनिया के 10 सबसे विलक्षण बच्चों में से एक माना है। 200 देशों में लोग उसे पहचानते हैं और 7 देशों में वह 150 से अधिक बार परफॉर्मेंस दे चुका है।

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