जिद्दी बच्चों को ऐसे संभालें !!

टीम चैतन्य भारत

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में बच्चों को संभालना एक बड़ी चुनौती बन गई है।बच्चों की देखरेख के अभाव में वे जिद्दी हो जाते हैं। उदाहरण के लिए समझें तो मीता एक कामकाजी महिला हैं, परिवार में पति और 5 साल के 2 जुडवा बच्चों की जिम्मेदारी संभाल रही हैं| घर, दफ्तर, कामकाज, खाना बनाना और साफ़ सफाई मीता के ज़िम्मे है, इसके चलते उनकी दिनचर्या बेहद व्यस्त रहती है| कई बार आपसी बातचीत का मौका भी कम मिल पाता है, फिर भी समझदारी और सहयोग से घर और दफ्तर में संतुलन बना हुआ है|

पर अब एक नये तरह के तनाव का मीता सामना कर रही है, अब बच्चे बड़े और जिद्दी होने लगे हैं| उनकी नयी नयी फरमाईशें, धमा-चौकड़ी, जिद्द, से मीता और उनके पति परेशान हो चुके हैं| अगर आप भी मीता जैसी परिस्थिति का सामना कर रही हैं, तो जाने इससे निपटने के उपाय|

ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिये आइये जानें :-

बच्चों के मनोविज्ञान को समझें, उनको प्यार से अनुशासित कीजिये। बच्चे से लगातार संपर्क में रहें, उसकी पसंद नापसंद, दोस्त, स्कूल में क्या हो रहा उससे पूछते रहें |

बच्चे को अपने व्यवहार से ये भी जता दें, कि उनकी हर मांग पूरी नहीं होगी| केवल उसकी जायज़ ज़रूरत ही पूरी होगी|

बच्चे को बचपन से ही समझ दें, कि अगर आप ने किसी बात पर न कहा है तो इस का अर्थ नहीं है| पहली न के बाद दूसरी या तीसरी न कहने की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए|

स्वयं अनुशासन का पालन करें, नियमित दिनचर्या रखें, बच्चा अपने आप अनुशासन सीखेगा|

  • बच्चों को संवाद करना सिखायें।
  • किस बात को किस तरह कहा जाता है मांगा जाता है बतायें|
  • प्रश्न कैसे पूछे जाते हैं,
  • कब थैंक्यु/सॉरी कहना है,
  • कुछ असामान्य दिखने पर बड़ों को कैसे बताना है,
  • खतरा महसूस होने पर खुद का बचाव कैसे करें,
  • अपनी बातें आपस में और बड़ों (माता पिता, टीचर) को कैसे बताएं आदि सिखाएं|बच्चे को बचपन से यह आदत डलवायें कि वो दिनभर की गतिविधि और सूचनाओं को आपसे साझा करे| मसलन आज स्कूल में क्या पढाया, आज स्कूल में उसका हैप्पी मोमेंट क्या था, उससे किस विषय में गुड मिला आदि| इस तरह बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बितायें|
  •  बच्चो की रूचि अनुसार उनको खेल, संगीत, चित्रकला में आगे बढ़ाये और उनकी प्रोग्रेस को लगातार चेक करते रहें| समय समय पर उनके स्कूल टीचर, स्पोर्ट टीचर, कोच, दोस्तों से मिलते रहें|
  • बच्चों को घर के कामों के प्रति ज़िम्मेदार बनाये, सभी काम समय से करना, चीज़ों को व्यवस्थित रखना, खुद का कमरा साफ़ रखना, अपना होमवर्क पूरा करना, दैनिक कार्यों की पहले से तैयारी आदि व्यवहारिक बातें उन्हें सिखा दें।
  • साथ ही हर काम का उद्देश और लक्ष्य स्पष्ट करें और उसे पाने के लिये प्रेरित करें| लक्ष्य प्राप्त करने पर उन्हें शाबाशी दें हो सके तो छोटा उपहार भी दें।
  • बच्चों के सामने आदर्श रखें, उन्हें वीर सपूतों की, राष्ट्र पुरुषों की, देशभक्ति, आज्ञा पालन विषयक कहानी सुनाये | बच्चो के मन में ऐसे राष्ट्रनिष्ठ वीरों के प्रेरणा दायक प्रसंग सुनाये और पढने को दें, इससे उनके मन में ऐसे राष्ट्रनिष्ठ चरित्र के प्रति श्रद्धा निर्माण होगी और वो अपने में ऐसे ही गुण का विकास करेंगे |

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