कोर्ट में तलाक लेने के लिए झगड़ते रहे माता-पिता, कोने में बैठी बच्ची ने कॉपी में बयां किया अपना दर्द

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चैतन्य भारत न्यूज

भोपाल. पति-पत्नी जज के सामने झगड़ते रहे और कोने में बैठी 7 साल की बच्ची अपनी कॉपी में अलगाव की तस्वीर उकेरती रही। यह नजारा फैमिली कोर्ट में देखने को मिला। जैसे ही जज की नजर बच्ची पर पड़ी तो उन्होंने उसे पास बुलाया और पूछा कि, किसका चित्र बना रही हो? फिर बच्ची ने जज को अपनी कॉपी दिखाई। इसके बाद जो हुआ वह सभी के लिए सबक था।



जानकारी के मुताबिक, जिला विधिक प्राधिकरण में एक महिला ने भरण-पोषण के लिए आवेदन किया था। जज ने पति-पत्नी को काउंसलिंग के लिए बुलाया। पति-पत्नी एक-दुसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे थे। इस दौरान कोने पर बैठी बच्ची पर जज आशुतोष मिश्रा की नजर पड़ी। फिर जज ने दंपती से पूछा-क्या यह बच्ची आपकी है। दंपती ने कहा-जी हां। जज ने बच्ची को कॉपी लेकर बुलाया और उससे कॉपी दिखाने को कहा। जैसे ही जज ने कॉपी पर बनी तस्वीर देखी तो वह दंग रह गए। उस बच्ची ने कॉपी में एक तरफ मम्मी, दूसरी तरफ पापा और बीच में अपनी तस्वीर बनाई थी।

जज ने पूछा- बेटा, मम्मी और पापा काे अपने से दूर-दूर क्याें बनाया? तुमने उनका हाथ क्याें नहीं पकड़ा? इसके बाद बच्ची ने बड़ी ही मासूमियत से कहा कि, ‘मम्मी-पापा लड़ते रहते हैं और अलग-अलग रहते हैं। वह दाेनाें के साथ रहना चाहती है।’ इसके बाद जज ने कहा- ‘बेटा, अब तुम जाे कहाेगी वही मम्मी-पापा करेंगे।’ इस पर बच्ची ने जज के कान में बहुत-सी बातें कहीं, जिसे जज ने उसके चित्र वाले पेज पर उसी की भाषा में लिखा।

बच्ची की बातों को जज ने उसी की कॉपी में लिखा। उसमे लिखा था कि, ‘मैं मम्मी और पापा से तब तक बात नहीं करूंगी, जब तक दाेनाें झगड़ना बंद नहीं करेंगे। दाेनाें जब तक झगड़ते रहेंगे, ताे वे मेरा हाथ कैसे पकड़ेगे। मैं जाे भी बात कहूंगी, उसे जज अंकल लिखेंगे। दाेनाें उसे पढ़ें। जब मम्मी मुझे बाहर भेजती है, उसके बाद मम्मी और पापा में लड़ाई हाेती है। उस समय मुझे अच्छा नहीं लगता। मेरी नानी के घर पर सब आकर रहें, ताकि नानी और दादी में दाेस्ती हाे जाए। मुझे नानी और दादी दाेनाें पसंद हैं। जब सब लाेग काम पर चले जाते हैं ताे दादी अकेले रहती है।’

जज की हिदायत

जज ने दंपत्ति को समझाते हुए कहा कि, ‘कब तक पति-पत्नी बनकर झगड़ा करते रहोगे। साेचाे तुम्हारे ऐसे बर्ताव से बच्ची की मानसिकता पर क्या असर पड़ रहा है। उसे कैसा भविष्य दे रहे हाे। जब तक बच्ची पैदा नहीं हुई थी, तब तक पति और पत्नी थे। बेटी के जन्म के बाद अपने ईगाे काे दरकिनार करके माता-पिता बन जाओ, उसकी भावनाओं के बारे में साेचाे। यही तुम दाेनाें की बाउंडिंग है, इसे मत ताेड़ाें, नहीं ताे बच्ची भावनात्मक रूप से बिखर जाएगी। बच्ची ने दाेनाें का फैसला कर दिया है, अब तुम्हें साेचना है क्या करना है। दंपती ने विचार के लिए वक्त मांगा है।’

क्या है मामला

महिला काेटरा सुल्तानाबाद निवासी है। उसने शिकायत की थी कि उसके पति उसे रोजाना प्रताड़ित करते हैं। दोनों की शादी 18 नवंबर 2011 काे उदयपुर में हुई थी।
1 जनवरी 2013 काे उनकी बेटी का जन्म हुआ था। पत्नी का कहना है कि ससुर के निधन के बाद से ही पति ज्यादा प्रताड़ित करने लगा है। फिर पत्नी बच्ची को लेकर भोपाल बीएड करने आ गई। इसके बाद उसने बच्ची और खुद के लिए भरण-पाेषण की मांग की।

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