छह माह की गर्भवती पत्नी को परीक्षा दिलाने के लिए पति ने चलाई करीब 1200 किमी स्कूटी, ताकि वो शिक्षिका बन सके

चैतन्य भारत न्यूज

यदि कोई काम करने की लगन हो तो वह काम जरूर पूरे होते ही हैं। इसी की मिसाल पेश करता है झारखंड का एक शादीशुदा जोड़ा, जिसमें पति ने गर्भवती पत्नी को बैठाकर 1200 किमी स्कूटर चलाया जिससे कि पत्नी की परीक्षा छूट ना जाए। धनंजय की पत्नी सोनी हेम्ब्राम 24 साल की हैं। वे शिक्षिका बनना चाहती हैं। सोनी ग्वालियर में डीलेड (डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन) द्वितीय वर्ष की परीक्षा दे रही हैं। पति 10वीं पास भी नहीं हैं।

धनंजय झारखंड के गोड्डा जिले के गांव गन्टा टोला के रहने वाले हैं। गोड्डा जिला बांग्लादेश की सीमा से बमुश्किल 150 किलोमीटर दूर है। धनंजय ने करीब 1176 किमी स्कूटी चलाई और झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश के विभिन्न् पहाड़ी-मैदानी रास्तों को पार करते हुए मप्र के ग्वालियर पहुंचे। दंपती ने ग्वालियर में ठहरने के लिए दीनदयाल नगर में 1500 रुपए में 10 दिन के लिए कमरा किराए पर लिया है। 11 सितंबर को परीक्षाएं संपन्ना होने के बाद यह दंपती वापस स्कूटी से ही झारखंड के लिए रवाना होंगे।

दशरथ और सोनी मांझी ने 28 अगस्त को अपनी सवारी शुरू की और 30 अगस्त को मध्य प्रदेश के ग्वालियर पहुंचे। इस पूरी यात्रा में सोनी मांझी अपने पति के पीछे बैठी रहीं ताकि वो अपने डिप्लोमा के दूसरे साल की परीक्षा दे सकें। धनंजय का कहना है कि, सोनी छह महीने की गर्भवती है, दिसंबर माह में प्रसव होने की उम्मीद है। परीक्षा देना जरूरी था, लेकिन ट्रेन बंद हैं व किराये के वाहन से आने में करीब 30 हजार रुपए का खर्चा आ रहा था। ऐसे में दोनों ने तय किया कि दोपहिया वाहन से ही यह सफर तय किया जाए।’

धनंजय ने कहा कि, ‘दोपहिया से इतना लंबा सफर करने से बहुत लोगों ने मना किया, काफी हद तक वे सही भी थे। रास्ते में तेज बारिश होने पर हम एक पेड़ के नीचे दो घंटे तक खड़े रहे। बिहार के भागलपुर से गुजरते समय बाढ़ का सामना करना पड़ा। विभिन्ना शहर व गांवों की बदहाल सड़कों से गुजरे। गड्ढों के कारण काफी परेशानी हुई। मुजफ्फरपुर में एक रात लॉज में और लखनऊ में एक रात टोल टैक्स बैरियर पर भी रुके।’ जब सोनी से पूछा गया कि, गर्भावस्था के बावजूद इतनी परेशानी झेलना क्यों चुना? तो सोनी ने अपनी कोख पर हाथ रखा और मुस्कुरा कर कहा ‘इसी के लिए तो सब कर रहे हैं। भाग्यशाली हूं, जो इतना प्यार करने वाला पति मिला।’

बता दें धनंजय कैंटीन में खाना बनाने का काम करते थे, बीते तीन माह से बेरोजगार हैं। स्कूटी में पेट्रोल भरवाने के लिए धनंजय ने अपनी पत्नी के जेवर 10 हजार रुपये में गिरवी रखे हैं, जिसके लिए मासिक 300 रुपए का ब्याज भी चुकाना होगा। धनंजय ने बताया कि एक तरफ के सफर में दोपहिया में पेट्रोल भरवाने में ही 3500 रुपए खर्च हो गए।

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