मानव शरीर को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है कोरोना वायरस, ये गंभीर बीमारियां हो सकती हैं

चैतन्य भारत न्यूज

कोरोना वायरस संकट के बीच इस महामारी को लेकर कई देशों द्वारा अध्ययन किया जा रहा है। 11 जून को प्रकाशित 50 से ज्यादा अध्ययनों की समीक्षा से यह सामने आया है कि कोविड-19 बीमारी के कारण बनने वाला सार्स-2 वायरस संक्रमित व्यक्ति के तंत्रिका तंत्र के लगभग हर स्तर को प्रभावित करता है। इसके कारण स्ट्रोक, दौरे और मांसपेशियों में दर्द हो सकता है।

कोरोना संक्रमित कुछ मरीजों में सिरदर्द, चक्कर आना, सतर्कता में कमी, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और गंध और स्वाद में कमी जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। भारत भी कोरोना के लक्षणों की सूची में बुखार और सांस लेने में तकलीफ के साथ ही गंध और स्वाद में कमी को जोड़ने पर विचार कर रहा है।

जानकारी के मुताबिक, कोरोना वायरस के कारण होने वाली अन्य बीमारियां, जिनमें गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम (सार्स) और मध्य पूर्व श्वसन सिंड्रोम (मार्स) शामिल हैं। साल 2019 के अंत में मध्य चीनी शहर वुहान से शुरू हुआ था ने कम से कम 78 लाख लोगों को प्रभावित किया है।

शिकागो में नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी फीनबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन में न्यूरोलॉजी के प्रोफेसर डॉ इगोर कोरालनिक का कहना है कि, ‘आम जनता और चिकित्सकों को इसके बारे में पता होना जरूरी है कि किसी भी बुखार, खांसी या सांस की समस्या होने से पहले व्यक्ति के शरीर में सार्स-2 के न्यूरोलॉजिकल लक्षण पैदा हो सकते हैं।’

हैदराबाद विश्वविद्यालय में तंत्रिका विज्ञान और संज्ञानात्मक विज्ञान केंद्र (सीएनसीएस) के प्रोफेसर और प्रमुख डॉ रमेश के मिश्रा ने कहा कि, ‘सांस लेने में दिक्कत को अभी भी कोरोना का एक परिभाषित लक्षण माना जाता है।’ उन्होंने आगे यह भी बताया कि, ‘इटली में चल रहे कई अध्ययनों से इस बात के पुख्ता सबूत मिल रहे हैं कि यह वायरस परिधीय तंत्रिका तंत्र (संवेदी) को प्रभावित कर सकता है। लेकिन कुछ रोगी जो पहले से ही कमजोर हैं यह वायरस उनकी केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी) और उनके दिमाग को प्रभावित कर सकता है।’

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