अन्य संस्कारों के साथ-साथ बच्चों को सिखाएं राष्ट्रधर्म के भी संस्कार

चैतन्य भारत न्यूज

बच्चे गीली मिट्टी के समान होते हैं। उन्हें बचपन में जो भी संस्कार दिए जाते हैं और उन्हें जो दिशा दिखाई जाती है बच्चे जीवनभर उसी ओर चलते हैं। बच्चों को अच्छे संस्कार देने के साथ ही उन्हें राष्ट्रधर्म के संस्कार भी दिए जाने चाहिए। उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाने का काम सिर्फ स्कूल में ही नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि अपनी मातृभूमि के लिए सम्मान और देश के प्रति स्वाभिमान की सोच की प्रेरणा बच्चों को घर पर भी सिखाना चाहिए।

बच्चा चाहे किसी भी धर्म में पैदा हुआ हो वह छोटी उम्र में ही अपने धर्म के तौर-तरीके सीख जाता है। माता-पिता अपने बच्चों के अंदर वह सभी संस्कार डाल देते हैं जो उनके लिए जरुरी होते हैं लेकिन देश प्रेम और देश के प्रति भाव जगाने के लिए ऐसा कुछ नहीं किया जाता है। जैसे कोई छोटा बच्चा अपने घर के संस्कारो और रीति-रिवाजों से जुड़ जाता है वैसे ही यदि उन्हें संस्कारों में राष्ट्रधर्म की शिक्षा भी दी जाए तो बचपन से ही उनके मन में अपने देश के प्रति सम्मान और गरिमा को सहेजने की सोच को प्रेरणा मिलेगी।

घर के बड़े-बुजुर्ग बच्चों को कभी राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का महत्व बता सकते हैं तो कभी तिरंगे का सम्मान करने की सीख दे सकते हैं। साथ ही वे बच्चों को देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले वीरों की कहानियां भी सुना सकते हैं। यह बदलाव ही बच्चों की सोच को बदलने में अहम साबित होंगे। मातृभूमि और राष्ट्रीय प्रतीक का सम्मान करना हर देश के नागरिक का धर्म और कर्त्तव्य है। इसलिए इस कर्त्तव्य को निभाने की सीख बच्चों को बचपन से ही मिलना चाहिए।

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