स्त्री-पुरुष समानता में भारत पिछड़कर 112वें स्थान पर पहुंचा, आर्थिक भागीदारी में स्थिति ज्यादा खराब : WEF

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चैतन्य भारत न्यूज

जेनेवा. लैंगिक समानता के मामले में अब भारत दुनियाभर में पिछड़कर 112वें स्थान पर पहुंच गया है। हाल ही में वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम (WEF) ने एक सर्वे की रिपोर्ट जारी की है जिसके मुताबिक, महिलाओं के स्वास्थ्य और आर्थिक भागीदारी के मामले में भारत सबसे निचले पांच देशों में खिसक गया है।



रिपोर्ट के मुताबिक, लैंगिक समानता के मामले में आईलैंड दुनिया का सबसे बेहतर देश है। इस देश में किसी भी तरह से लिंग आधारित भेदभाव नहीं है। इस मामले में भारत पिछले साल 108 वें स्थान पर था और इस बार 4 स्थान पिछड़ कर 112 वें स्थान पर पहुंच गया है। इस मामले में श्रीलंका (102), नेपाल (101), ब्राजील (92), इंडोनेशिया (85) और बांग्लादेश (50) रैंक पर है। भारत के बाद यमन की रैंक 153, ईराक की 152 और पाकिस्तान की 151 है।

अभी भी भेदभाव मौजूद है

डब्लूईएफ ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि, दुनियाभर में लैंगिक भेद वैसे तो कम हो रहा है लेकिन अभी भी महिलाओं और पुरुषों के बीच स्वास्थ्य, शिक्षा, कार्यालय और राजनीति में भेदभाव मौजूद है। डब्लूईएफ ने कहा कि, ‘ये साल राजनीति में महिलाओं की उल्लेखनीय वृद्धि के रूप में जाना जा सकता है। यदि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी ऐसे ही बढ़ी तो लिंगभेद खत्म करने में 95 साल लगेंगे, ये आंकड़ा बीते साल 107 साल था। हालांकि देश में शिक्षा, स्वास्थ्य, काम और राजनीति के क्षेत्र में महिलाओं और पुरुषों में अभी भी असमानता है। हालांकि, 2018 में स्थिति थोड़ी बेहतर हुई थी।’

आर्थिक भागीदारी के मामलों में बढ़ रही असमानता

जहां एक ओर राजनीति में महिलाओं को लेकर असमानता की खाई कम हो रही है, वहीं दूसरी तरफ आर्थिक मौकों में यह खाई बढ़ रही है। बता दें पिछले साल इसका अनुमान 202 सालों का था जो अब बढ़कर 257 साल हो गया है। सर्वे में कहा गया था कि, इस असमानता को खत्म करने में सबसे बड़ी चुनौती क्लाउंड कंप्यूटिंग, इंजीनियरिंग और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जैसे उभरते क्षेत्रों में महिलाओं का कम प्रतिनिधित्व होना है।

रैंकिंग में पिछड़ता जा रहा भारत

बता दें डब्लूईएफ ने लैंगिक असमानता को लेकर अपनी पहली रिपोर्ट साल 2006 में पेश की थी। उस समय भारत 98वें स्थान पर था। फिर भारत की रैंक सर्वे के चार में तीन मानकों पर खराब होती गई है। राजनीतिक सशक्तिकरण के मामले में भारत बढ़कर जरूर 18वें स्थान पर पहुंचा है, लेकिन स्वास्थ्य के मामले में यह फिसलकर 150वें, आर्थिक भागीदारी के मामले में 149वें और शिक्षा के मामले में यह 112वें स्थान पर पहुंच गया है।

इन देशों में महिलाओं के सीमित आर्थिक मौके

सर्वे के मुताबिक, भारत उन देशों की लिस्ट में शामिल है, जिसमें कंपनियों के बोर्ड में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सबसे कम है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में यह संख्या केवल 13.8 प्रतिशत है। इस मामले में चीन 9.7 प्रतिशत के साथ सबसे पीछे है। सर्वे के मुताबिक, भारत (35.4 प्रतिशत), पाकिस्तान (32.7 प्रतिशत), यमन (27.3 प्रतिशत), सीरीया (24.9 प्रतिशत) और इराक (22.7 प्रतिशत) में महिलाओं के लिए बेहद सीमित आर्थिक मौके होते हैं।

भारत में बढ़ रहा है आर्थिक भागीदारी में लैंगिक असमानता

डब्लूईएफ ने रिपोर्ट में कहा कि, भारत ने दो तिहाई लैंगिक भेदभाव को खत्म कर दिया है, लेकिन भारतीय समाज के बड़े हिस्से में महिलाओं की स्थिति खासतौर पर आर्थिक भेदभाव के मामले में अनिश्चित बनी हुई है। 2006 से यह यह खाई बढ़ती जा रही है।

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