भारतीय रेलवे ने कबाड़ बेचकर कमाए 35 हजार करोड़ रुपए, आरटीआई में हुआ खुलासा

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चैतन्य भारत न्यूज

भारतीय रेलवे ने कबाड़ बेचकर अपने खजाने में एक बड़ी धनराशि जोड़ी है। कहा जा रहा है कि कमाई का ये आंकड़ा पूर्वोत्तर के तीन राज्यों के वार्षिक बजट से भी अधिक है। रेलवे की तरफ से एक आरटीआई आवेदन के जवाब में जारी ब्यौरे के मुताबिक विभाग ने बीते 10 सालों में कबाड़ से 35,073 करोड़ रुपए की आमदनी की है। इसमें कोच, वैगन्स और पटरी के कबाड़ शामिल हैं।



आरटीआई के तहत रेलवे बोर्ड के ब्‍योरे में बताया गया है कि बीते 10 साल में सबसे ज्यादा स्क्रैप यानी कबाड़ 4,409 करोड़ रुपए का साल 2011-12 में बेचा गया, जबकि सबसे कम कबाड़ से आमदनी वर्ष 2016-17 में 2,718 करोड़ रुपए हुई।

रेलवे बोर्ड के मुताबिक, बेचे गए कबाड़ में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रेल पटरियों की है। साल 2009-10 से 2013-14 के बीच 6,885 करोड़ रुपए के स्क्रैप बेचे गए, वहीं वर्ष 2015-16 से 2018-19 की अवधि के बीच 5,053 करोड़ रुपए के स्क्रैप बेचे गए। कुल मिलाकर 10 साल में रेल पटरियों का स्क्रैप बेचने से 11,938 करोड़ रुपए की आमदनी हुई है।

भारतीय रेलवे के द्वारा उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि साल 2009-10 से 2013-14 के बीच 5 साल की तुलना में 2014-15 से 2018-19 के बीच रेल पटरी का कबाड़ कम निकला है। इससे ऐसा लगता है कि अंतिम 5 साल में रेल पटरियों में कम बदलाव हुआ है। अगर रेल पटरी बदलती तो उसी अनुपात में पुरानी पटरी का कबाड़ कम निकलता है।

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