ट्रेनों में अब कंबल खुद बताएगा- मैं गंदा हो गया हूं…

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चैतन्य भारत न्यूज

लखनऊ. भारतीय रेल के वातानुकूलित (एसी) कोच में मिलने वाले गंदे बेडरोल की शिकायतें काफी पुरानी हैं। अकसर आरोप लगता है कि रेलवे इसकी सुनवाई नहीं करता लेकिन अब गंदा होने पर कंबल खुद बताएगा…मैं हो गया गंदा। कंबल की इलेक्ट्रॉनिक टैगिंग से अब वह 15 दिन के भीतर धुलाई न होने पर रेलवे को अलर्ट भेज देगा। उत्तर रेलवे का लखनऊ मंडल सभी ट्रेनों के करीब 10 हजार कंबलों में 15 सितंबर से यह व्यवस्था शुरू करने जा रहा है।

रेलवे यात्रियों को जो बेडरोल उपलब्ध कराता है, उसमें तकिया कवर, चादर और तौलिया को एक बार इस्तेमाल के बाद धोने का नियम है। जबकि कंबल की धुलाई 15 दिन में करवाने की व्यवस्था है। हालांकि, हकीकत में उन्हें दो से ढाई महीने बाद धोया जाता है। यही वजह है, बेडरोल में बदबूदार कंबल की शिकायतें सबसे ज्यादा आती हैं। इसी को देखते हुए रेलवे ने कंबल धुलाई की ऑनलाइन मॉनिटरिंग का निर्णय लिया है।

इस तरह होगी मॉनिटरिंग

बड़े शॉपिंग मॉल्स में बिकने वाले कपड़ों व अन्य सामान की तरह प्रत्येक कंबल की टैगिंग की जाएगी। इसमें एक बार कोड होगा, जिसे हर बार धुलाई के समय स्कैन कर उसका डाटा कंप्यूटर में फीड किया जाएगा। हर एक कंबल का एक आईडी नंबर बनाया जाएगा, जो कंबल की टैगिंग पर दर्ज होगा। एक बार धुलाई के बाद कंबल को दोबारा 15 दिन पूरा होने पर धोने के लिए भेजना होगा। ऐसा न करने पर 16वें दिन कम्प्यूटर एक अलार्म देगा जिसमें आईडी नंबर से यह पता चलेगा कि कौन सा कंबल है जिसकी धुलाई का समय पूरा हो गया है। रेलवे प्रशासन आईडी नंबर से उस कंबल को ढूंढ लेगा।

निर्धारित दिन से पहले अटेंडेंट की जिम्मेदारी

यदि कंबल 15 दिन से पहले गंदा होगा तो कोच अटेंडेंट उसे निकालकर लांड्री को वापस सौंपेगा। वहां उसकी धुलाई की ऑनलाइन फीडिंग फिर से होगी। रेलवे निजी एजेंसी की मदद से ऑनलाइन मॉनिटरिग का सॉफ्टवेयर और प्रोग्राम बनवा रहा है।

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