देश की बेबीकॉर्न कंपनियों में नंबर वन इंदौर की किराना शॉप

चैतन्य भारत न्यूज

इंदौर. बिजनेस की दुनिया की सबसे बड़ी और नामी मैगजीन ‘फोर्ब्स इंडिया’ ने एक सर्वे के जरिए भारत की टॉप बेबीकॉर्न कंपनियों का चुनाव किया है। इस सर्वे में भारत की करीब 500 कंपनियों ने हिस्सा लिया था जिनमें से मध्यप्रदेश के इंदौर की एक कंपनी ने पहला स्थान हासिल किया है। ‘शॉप किराना’ नाम की इस कंपनी को फोर्ब्स इंडिया मैगजीन ने जुलाई अंक के कवर पेज पर भी जगह दी है। यह प्रदेश की पहली ऐसी दुकान है जिसने यह उपलब्धि हासिल की है।

तीन दोस्तों ने मिलकर खोली कंपनी

साल 2015 में दीपक धनोतिया, तनुतेजस सारस्वत और सुमित घोरावत नाम के तीन दोस्तों ने मिलकर इस स्टार्टअप को शुरू किया था। इस स्टार्टअप को अमेरिका और जापान की कंपनियों से 14 करोड़ रुपए की फंडिंग भी मिल चुकी है। दुकान के मालिक दीपक ने बताया कि, ‘करीब दो महीने पहले फोर्ब्स इंडिया ने सर्वे शुरू किया था। उनके एडिटर हमारे पास डेढ़ महीने पहले अपनी टीम के साथ आए थे। एक महीने तक उन्होंने हमारी कंपनी की पूरी जानकारी हासिल की।’ दीपक ने आगे बताया कि, ‘फोर्ब्स की टीम ने ही उन्हें बताया कि मप्र से आज तक किसी कंपनी को फोर्ब्स के कवर पेज पर जगह नहीं मिली है।’

फोर्ब्स ने पहले 50 कंपनियों को चुना

बेबीकॉर्न कंपनियों के चुनाव के लिए फोर्ब्स की टीम ने भारत की 500 कंपनियों में से 50 को चुना। फिर उन्होंने इन 50 में से 10 कंपनियों का चुनाव किया। ‘शॉप किराना’ का बिजनेस मॉडल और उनकी ग्रोथ ने फोर्ब्स को इतना प्रभावित किया कि मैगजीन ने अपने कवर पेज पर उनकी सक्सेस स्टोरी छापने का निर्णय लिया गया।

चार साल पहले की स्टार्टअप शुरुआत

तनुतेजस और सुमित ने बताया कि, जब चार साल पहले उन्होंने कंपनी की शुरुआत की थी तो पहले साल का टर्नओवर करीब 2 करोड़ रुपए था। फिर उन्होंने तीन साल तक लगातार मेहनत की।
2018 में उन्हें अमेरिका की बैटर केपिटल, जापान की इन्क्यूबेट फंड और भारत की नौकरी डॉट कॉम ने मिलकर 14 करोड़ रुपए की फंडिंग दी। इस फंडिंग से उन्होंने फरवरी में जयपुर, सूरत और बड़ौदा में भी काम शुरू किया। अगस्त से वह उत्तरप्रदेश के लखनऊ, कानपुर और वाराणसी में भी बिजनेस की शुरूआत करने जा रहे हैं। टॉप बेबीकॉर्न में चुने जाने के पीछे कंपनी की ग्रोथ ने काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

क्या होती हैं बेबीकॉर्न कंपनियां?

सालभर में हजार करोड़ के टर्नओवर वाली कंपनियों को यूनिकॉर्न कहा जाता है। जो कंपनियां टर्नओवर के मामले में यूनिकॉर्न से दस गुना छोटी होती हैं, लेकिन उनमें एक-डेढ़ साल में यूनिकॉर्न बनने की क्षमता रहती है, उन्हें बेबीकॉर्न कहा जाता है।

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