खजराना गणेश मंदिर ने रचा इतिहास, इस मामले में वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ नाम

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चैतन्य भारत न्यूज

इंदौर. मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी और सफाई के मामले में भारत में नंबर एक इंदौर ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। इंदौर के विश्व प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर का नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन (World book of records london) में दर्ज हुआ है। यह रिकॉर्ड श्रद्धालुओं के दर्शन करने के मामले में बना है।


8 लाख से ज्यादा लोगों ने किए दर्शन

साल 2020 के पहले दिन सबसे ज्यादा श्रद्धालुओं ने खजराना गणेश मंदिर में दर्शन कर मंदिर का नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स लंदन में दर्ज करा दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक,1 जनवरी 2020 को खजराना गणेश मंदिर में 8 लाख 35 हजार 917 श्रद्धालुओं ने खजराना गणेश मंदिर में दर्शन किए।

गणेश के चरणों में सर्टिफिकेट समर्पित

इसके बाद वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा खजराना गणेश के चरणों में लिस्टिंग सर्टिफिकेट पेश किया गया। इस मौके पर वर्ल्ड बुक ऑफ रिकार्ड्स की तरफ से मधुर टेमले,प्रदीप मिश्रा,संजय पंजवानी और आशीष मिश्रा उपस्थित थे। मंदिर प्रबंधन समिति के महाप्रबंधक बी एल कांसट, प्रबंधक जी एस मिश्रा,मंदिर के पुजारी पंडित अशोक भट्ट, विनीत भट्ट, मोहन भट्ट मौजूद थे। बता दें खजराना गणेश मंदिर को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकार्ड्स लंदन में शामिल होने पर ब्रिटिश पार्लियामेंट के सांसद वीरेंद्र शर्मा, इंदौर के कमिश्नर आकाश त्रिपाठी, कलेक्टर लोकेश जाटव, निगम कमिश्नर आशीष सिंह और इंदौर सांसद शंकर लालवानी ने शुभकामनाएं दी हैं।

श्रद्धालुओं के लिए किए गए विशेष इंतजाम

खजराना गणेश मंदिर में 31 दिसंबर की रात 12 बजे से ही दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ था। इनमें देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालु शामिल थे। कई किलोमीटर लंबी लाइन में लगकर लाखों श्रद्धालुओं ने नए साल की शुरुआत बप्पा का आशीर्वाद लेकर और उनके दर्शन कर की। मंदिर प्रशासन ने पहले से ही श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम किए थे। इस दिन मंदिर के गर्भगृह में भक्तों का प्रवेश बंद कर दिया था।

खजराना गणेश मंदिर का इतिहास

कहा जाता है कि खजराना मंदिर निर्माण के लिए स्थानीय पंडित मंगल भट्ट के सपने में भगवान गणेश आए थे। फिर पंडित भट्ट ने अपने इस सपने के बारे में सभी को बताया। जब यह बात रानी अहिल्या बाई होलकर तक पहुंची तो उन्होंने इसे बेहद गंभीरता से लिया और सपने के अनुसार उस जगह खुदाई करवाई। खुदाई के बाद ठीक वैसी ही भगवान गणेश की प्रतिमा प्राप्त हुई जैसी पंडित भट्ट को सपने में दिखी थी। इसके बाद साल 1735 में उसी जगह मंदिर निर्माण करवाया गया। मंदिर परिसर में भगवान शिव और मां दुर्गा के मंदिर सहित छोटे-बड़े कुल 33 मंदिर हैं। मंदिर परिसर में पीपल का एक प्राचीन पेड़ भी है। इस पीपल के पेड़ के बारे में मान्यता है कि यह मनोकामना पूर्ण करने वाला पेड़ है।

देश का सबसे धनी मंदिर

देश के सबसे धनी गणेश मंदिरों में खजराना गणेश मंदिर का नाम भी शामिल है। यहां हर साल करोड़ों रुपए का चढ़ावा आता है, जिसमें विदेशी मुद्राएं और सोने-चांदी के जेवरात भी शामिल रहते हैं। जानकारी के मुताबिक, भगवान गणेश का श्रृंगार तीन करोड़ के गहनों से किया जाता है।

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मिल चुका है सेफ भोग प्लेस का अवार्ड

इससे पहले खजराना गणेश मंदिर की भोजनशाला को भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण एफएसएसएआइ द्वारा सेफ भोग प्लेस का प्रमाण पत्र दिया गया था। यहां मिलने वाला प्रसाद और अन्य खाद्य सामग्री शुद्घ एवं सुरक्षित होती है। बता दें खजराना गणेश मंदिर से पहले यह प्रमाण पत्र उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर की भोजनशाला को भी मिल चुका है।

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