क्या सच में थे रावण के 10 सिर? जानिए रावण से जुड़ी कुछ अनोखी बातें

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चैतन्य भारत न्यूज

असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक पर्व दशहरा भारत में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। हिंदू धर्म की पौराणिक कथा रामायण के अनुसार प्रभु श्रीराम ने जिस दिन लंकापति रावण का वध किया था, उस दिन को दशहरे के रूप में मनाते हैं। रावण से जुड़ी ऐसी कई अनोखी बातें हैं जिन्हें कम ही लोग जानते हैं। तो आइए जानते हैं रावण की कुछ दिलचस्प बातें।



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आज भी लोगों को हैरानी होती है कि रावण के वाकई दस सिर थे या ये महज एक अफवाह है। कहा जाता है कि रावण के कोई दस सिर नहीं थे बल्कि उनके गले में 9 मणियों की एक माला थी। ये माला रावण के 10 सिर होने का भ्रम पैदा करती थी। रावण को मणियों की यह माला उनकी मां ने दी थी।

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रावण भगवान शिव जी का सबसे बड़ा भक्त था। भगवान शिव ने ही उन्हें रावण नाम दिया था। पुराणों के मुताबिक, रावण शिव को कैलाश पर्वत से लंका ले जाना चाहता है लेकिन शिव इसके लिए बिलकुल तैयार नहीं थे। इसके बाद रावण ने शिव को पूरे कैलाश पर्वत के साथ उठाने की कोशिश की तो शिव की ताकत से उनकी उंगली दब गई और वो दर्द से तड़पने लगा। अधिक दर्द होने पर भी रावण शिव के सामने तांडव करने लगा जिसे देख शिव चौंक गए और प्रसन्न होकर दशानन को रावण नाम दिया, जिसका अर्थ होता है तेज आवाज में दहाड़ना।

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रावण को चारों वेदों का ज्ञान था। रावण को एक अच्छा रणनीतिकार और बुद्धीमानी ब्राह्मण का दर्जा मिला हुआ था। रावण ने अपने अंतिम समय में भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण को जीवन में सफलता से जुड़े कई मूल मंत्र दिए थे। रावण को संगीत से बहुत प्रेम था। कहा जाता है कि रावण को रूद्र वीणा बजाने में हराना लगभग नामुमकिन था। रावण जब भी परेशान होते थे तो वीणा बजाते थे।

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रावण-राम में दुश्मनी होने के बावजूद रावण ने राम के लिए एक बार यज्ञ भी किया था। दरअसल राम जी की सेना को समुद्र पर सेतु बनाने के लिए शिवजी का आशीर्वाद चाहिए था और इसके लिए एक यज्ञ करना था जो सिर्फ ज्ञानी ब्राह्मण द्वारा ही संभव था। इसके लिए राम ने रावण को यज्ञ करने का निमंत्रण भेजा। वहीं रावण भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था, इसलिए वो इस निमंत्रण को ठुकरा न सका।

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