अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस : दुनियाभर में भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने की एक पहल

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चैतन्य भारत न्यूज

प्रतिवर्ष दुनियाभर में 09 दिसंबर को ‘अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। दुनिया भर में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। यह दिवस संयुक्त राष्ट्र के तहत दुनिया भर में मनाया जाता है और 2030 के सतत विकास लक्ष्य को बनाए रखने के भ्रष्टाचार के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को भी प्रोत्साहित करता है।


क्यों मनाया जाता है ‘भ्रष्टाचार विरोधी दिवस’

दुनियाभर में एक समृद्ध समाज को बनाए रखने के लिए भ्रष्टाचार को खत्म करना ही इस दिन का मुख्य उद्देश्य है। 31 अक्टूबर 2003 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव पारित कर ‘अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस’ मनाए जाने की घोषणा की। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनजीए) द्वारा यह दिवस प्रत्येक वर्ष 09 दिसंबर को मनाए जाने की घोषणा की गई थी। वैसे भष्टाचार के खिलाफ पूरी दुनिया का इस जंग में शामिल होना एक शुभ घटना ही मानी जा सकती है, क्योंकि भ्रष्टाचार किसी एक देश की नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व की समस्या है। इस दिन सभी सरकारी, प्राइवेट और गैर-सरकारी सस्थाएं एवं नागरिक संगठन भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुटता से लड़ाई लड़ने का संकल्प लेते हैं। वर्ष 2016 में इसका लक्ष्य संयुक्त अंतरराष्ट्रीय अभियान सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करना निर्धारित किया गया।

भ्रष्टाचार किसे कहते हैं?

भ्रष्टाचार अर्थात भ्रष्ट+आचार। भ्रष्ट यानी बुरा या बिगड़ा हुआ तथा आचार का मतलब है आचरण। अर्थात भ्रष्टाचार का शाब्दिक अर्थ है वह आचरण जो किसी भी प्रकार से अनैतिक और अनुचित हो। सार्वजनिक जीवन में स्वीकृत मूल्यों के विरुद्ध आचरण को भ्रष्ट आचरण समझा जाता है। आम जन जीवन में इसे आर्थिक अपराधों से जोड़ा जाता है। जब कोई व्यक्ति न्याय व्यवस्था के मान्य नियमों के विरूद्ध जाकर अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए गलत आचरण करने लगता है तो वह व्यक्ति भ्रष्टाचारी कहलाता है।

भ्रष्टाचार के प्रकार:

  • घूस (रिश्वत) लेना।
  • चुनाव में धांधली करना।
  • हफ्ता वसूली करना।
  • जबरन चन्दा लेना।
  • अपने विरोधियों को दबाने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करना।
  • न्यायाधीशों द्वारा गलत या पक्षपातपूर्ण निर्णय करना।

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