अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस : भारत की 21.9% आबादी गरीबी रेखा के नीचे! ये हो सकते हैं कारण

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चैतन्य भारत न्यूज

17 अक्टूबर को दुनियाभर में ‘अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस’ (International Day for the Eradication of Poverty) मनाया गया। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य विश्व समुदाय में गरीबी दूर करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के संबंध में जागरूकता बढ़ाना है। दुनियाभर में फैली गरीबी के निराकरण के लिए ही 22 दिसंबर 1992 में संयुक्त राष्ट्र ने हर साल 17 अक्टूबर को गरीबी उन्मूलन दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।



अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस पहली बार साल 1987 में फ्रांस में मनाया गया था। जिसमें लगभग एक लाख लोगों ने मानव अधिकारों के लिए प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन को एटीडी फोर्थ वर्ल्ड के संस्थापक जोसफ व्रेंसिकी ने शुरू करवाया था। लेकिन 1992 के बाद से इसे हर साल 17 अक्टूबर को मनाया जाने लगा। अंतरराष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस पर विभिन्न राष्ट्रों द्वारा गरीबी उन्मूलन के लिए प्रयास, विकास एवं विभिन्न कार्यों व योजनाओं को जारी किया जाता है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की दो तिहाई गरीब आबादी पांच देशों भारत, चीन, नाइजीरिया, बांग्लादेश और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो में रहती है। भारत की ही बात करें तो यहां गरीबी का मुख्य कारण बढ़ती जनसंख्या, कमजोर कृषि, भ्रष्टाचार, रूढ़िवादी सोच, जातिवाद, अमीर-गरीब में ऊंच-नीच, नौकरी की कमी, अशिक्षा, बीमारी आदि हैं। भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है, बावजूद इसके हमारे देश में मौजूद सबसे ज्यादा संख्या मे किसान ही इस गरीबी को झेलने के लिए मजबूर हैं।

बता दें हर सरकार देश में गरीबों के लिए एक निश्चित दर तय करती हैं। साल 2012 में आई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की 21.9 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा के नीचे रहती है। साल 2016 में जारी अंतरराष्ट्रीय भुखमरी सूचकांक में भारत को 97वां स्थान मिला था। बता दें इसमें विकासशील देशों के लिए औसत दर 21.3 रखी गई थी और उस समय भारत की दर 28.5 प्रतिशत थी। साल 2017 की रिपोर्ट में भारत को 119 देशों में 100वां स्थान दिया गया था।

संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य में यह बताया गया है कि, किसी एक विशेष कारण के चलते नहीं बल्कि कई अलग-अलग कारणों की वजह से लोगों को गरीबी में जीवन यापन करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसलिए यह जरुरी है कि केवल आय का स्रोत और आमदनी ही गरीबी का कारण नहीं है बल्कि भोजन, घर, भूमि, स्वास्थ्य आदि भी गरीबी के निर्धारण में भूमिका निभाते हैं।

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