एवरेस्ट से कम ऊंचाई होने के बावजूद आज तक कोई क्यों न चढ़ सका कैलाश पर्वत? जानिए इससे जुड़ी रहस्यमयी बातें

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चैतन्य भारत न्यूज

हर साल 11 दिसंबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस’ मनाया जाता है। इस अवसर पर आज हम आपको कैलाश पर्वत के बारे में बता रहे हैं, जिसका वर्णन धर्म ग्रंथों में किया गया है। हिंदू धर्म में कैलाश पर्वत का बड़ा महत्व है, क्योंकि यह भगवान शिव का निवास स्थान भी माना जाता है। आइए जानते हैं इस पर्वत से जुड़ी कुछ रोचक बातें जिन्हें बहुत कम लोग जानते हैं।



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कैलाश पर्वत की ऊंचाई एवरेस्ट से काफी कम है। बावजूद इसके आज तक कोई इंसान कैलाश पर्वत की ऊंची चोटी को नहीं छू पाया है। 8848 मीटर फीट से ऊंचे माउंट एवरेस्ट को अभी तक 7000 से ज्यादा लोग फतह कर चुके हैं। जबकि कैलाश पर्वत की ऊंचाई एवरेस्ट से करीब 2200 मीटर कम यानी 6638 मीटर है।

भगवान शिव करते हैं निवास 

कुछ लोगों का मानना है कि कैलाश पर्वत पर शिव जी निवास करते हैं और इसीलिए कोई जीवित इंसान वहां ऊपर नहीं पहुंच सकता। मरने के बाद या वह जिसने कभी कोई पाप न किया हो, केवल वही कैलाश फतह कर सकता है।

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कहते हैं कि कैलाश पर्वत पर थोड़ा-सा ऊपर चढ़ते ही व्यक्ति दिशाहीन हो जाता है। चूंकि बिना दिशा के चढ़ाई करना मतलब मौत को दावत देना है, इसीलिए कोई भी इंसान आज तक कैलाश पर्वत पर नहीं चढ़ पाया। इस पर्वत पर चढ़ने की अब तक कई बार कोशिशें की जा चुकी हैं, लेकिन किसी को भी सफलता हासिल नहीं हो पाई है। पर्वतारोहियों की इस असफलता के पीछे कई वैज्ञानिक तर्क भी दिए जा चुके हैं।

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इस पर रिसर्च करने वाले ह्यूरतलीज ने कैलाश पर्वत पर चढ़ने को असंभव बताया है। जबकि पर्वतारोही कर्नल आर.सी. विल्सन ने बताया कि, ‘जैसे ही मुझे लगा कि मैं एक सीधे रास्ते से कैलाश पर्वत के शिखर पर चढ़ सकता हूं, भयानक बर्फबारी ने रास्ता रोक दिया और चढ़ाई को असंभव बना दिया।’

पर्वत के पास पहुंचकर दिल तेजी से धड़कने लगा

रूस के एक पर्वतारोही सरगे सिस्टियाकोव ने भी कहा था कि, ‘जब मैं पर्वत के बिल्कुल पास पहुंच गया तो मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा। मैं उस पर्वत के बिल्कुल सामने था, जिस पर आज तक कोई नहीं चढ़ सका। अचानक मुझे बहुत कमजोरी महसूस होने लगी और मन में ये ख्याल आने लगा कि मुझे यहां और नहीं रुकना चाहिए। उसके बाद जैसे-जैसे हम नीचे आते गए, मन हल्का होता गया।’

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इसके अलावा कहते हैं कि कैलाश पर्वत का स्लोप (कोण) भी 65 डिग्री से ज्यादा है, जबकि माउंट एवरेस्ट में यह 40-60 तक है, जो इसकी चढ़ाई को और मुश्किल बनाता है। ये भी एक वजह है कि पर्वतारोही एवरेस्ट पर तो चढ़ जाते हैं, लेकिन कैलाश पर्वत पर नहीं चढ़ पाते।

2001 में की गई थी कोशिश 

कैलाश पर्वत पर चढ़ने की आखिरी कोशिश साल 2001 में की गई थी। जब चीन ने स्पेन की एक टीम को कैलाश पर्वत पर चढ़ने की अनुमति दी थी। फिलहाल कैलाश पर्वत की चढ़ाई पर पूरी तरह से रोक लगी हुई है, क्योंकि भारत और तिब्बत समेत दुनियाभर के लोगों का मानना है कि यह पर्वत एक पवित्र स्थान है, इसलिए इस पर किसी को भी चढ़ाई नहीं करने देना चाहिए।

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रूस के वैज्ञानिकों की स्टडी के मुताबिक, कैलाश मानव निर्मित पिरामिड हो सकता है, जिसका निर्माण किसी दैवीय शक्ति वाले व्यक्ति ने किया होगा। माना जाता है कि कैलाश पर्वत में पृथ्वी का भौगोलिक केंद्र है। यहां आसमान और धरती का मिलन होता है। साथ ही यहां चारों दिशाओं का केंद्र बिंदु है। इसके अलावा कहा जाता है कि यह ईश्वर और उनकी बनाई सृष्टि के बीच संवाद का केंद्र बिंदु है।

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