आत्महत्या रोकथाम दिवस : हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति करता है आत्महत्या, मौत नहीं, जिंदगी को इस तरह लगाएं गले

चैतन्य भारत न्यूज

आत्महत्या की समस्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। जहां विज्ञान की प्रगति से बीमारियों से होने वाली मृत्यु संख्या में कमी हुई है तो वहीं आत्महत्याओं की संख्या पहले से अधिक हो गई है। यह समाज के हर एक व्यक्ति के लिए चिंता का विषय है। इसलिए 10 सितंबर ‘विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस’ (International Suicide Prevention Day) के रूप में मनाया जाता है।

क्यों मनाया जाता है यह दिवस

यह दिन आत्महत्या से बचाव जैसे ज्वलंत विषय उठाता है और सरकारी तथा निजी संस्थाओं को देश के युवाओं में इस बात की समझ और जागरूकता पैदा करने का अवसर देता है कि जीवन बहुत महत्वपूर्ण है और किसी असफलता के पीछे इसे गंवाना नहीं चाहिए। जीवन में अच्छे-बुरे मोड़ और सफलताएं -असफलताएं आती रहती हैं, लेकिन इन सबसे आगे यह एक अनमोल निधि है और ईश्वर के दिए इस जीवन का हर हाल में सम्मान करना चाहिए।

हर साल 8 लाख से ज्यादा लोग करते हैं आत्महत्या

2014 में पेश डब्ल्‍यूएचओ की पहली ग्‍लोबल रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल 8 लाख से अधिक लोग आत्महत्या करके मरते हैं। इनमें 75% आत्महत्याएं निम्न और मध्यम आय वाले देशों में होती हैं।आत्महत्या दुनिया भर में होती है और लगभग किसी भी उम्र में हो सकती है। वैश्विक स्तर पर, 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों में आत्महत्या की दर सबसे अधिक है। हालांकि, कुछ देशों में सबसे अधिक आत्‍महत्‍या की दर युवा के बीच पाए जाते हैं। विशेष रूप से, आत्महत्या विश्व स्तर पर 15-29 वर्षीय बच्चों में मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण है। आमतौर पर महिलाओं की तुलना में पुरुषों में आत्महत्या की दर ज्‍यादा है। अमीर देशों में महिलाओं की तुलना में पुरुष तीन गुना अधिक आत्महत्या से मरते हैं। इन आंकड़ों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि आत्‍महत्‍या एक गंभीर समस्‍या है, जिसका समाधान होना जरूरी है।

आत्‍महत्‍या क्‍या है ?

आत्महत्या (Suicide) अपने आप में एक मानसिक बीमारी नहीं है, लेकिन उपचार योग्य मानसिक विकारों का एक गंभीर संभावित परिणाम है जिसमें प्रमुख रूप से अवसाद, बाइपोलर डिसऑर्डर, पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर, बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर, सिज़ोफ्रेनिया, सब्‍सटैंस यूज डिऑर्डर और चिंता जैसे बुलीमिया और एनोरेक्सिया नर्वोसा शामिल हैं। डॉ. आनंद के मुताबिक, जब कोई व्‍यक्ति अवसाद और निराशावाद के घेरे में आ जाए और समस्‍या का समाधान दिखाई देना बंद हो जाए और किसी तरह का भावनात्‍मक सपोर्ट भी न मिले तो ऐसी स्थिति में व्‍यक्ति आत्‍महत्‍या कर लेता है।

आत्‍महत्‍या करने के संकेत

  • जब किसी व्‍यक्ति के अंदर अचानक, अकारण रोने की भावना उत्‍पन्‍न होने लगे।
  • जब कोई व्‍यक्ति सुसाइड के तरीकों और कैसे किया जाता है, इसे डिसाइड करने लगे।
  • आपराधिक व्‍यवहार का बढ़ना।
  • सामान्‍य सी बात पर भी क्रोधित हो जाना।
  • सामाजिक रिश्‍ते और जिम्‍मेदारियों से दूर भागने लगना।

आत्महत्या से जुड़े तथ्य

  • आज भी हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति आत्महत्या कर रहा है।
  • भारत में हर साल एक लाख से ज्यादा लोग करते हैं आत्महत्या ।
  • एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक हर एक घंटे में भारत में एक छात्र आत्महत्या करता है।

ऐसे रहे टेंशन फ्री

  • सही लाइफस्टाइल का चुनाव करें।
  • हेल्दी खाएं, शारीरिक व्यायाम को रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाएं।
  • जिंदगी के प्रति संतुलित नजरिया रखें। अच्छा और बुरा दोनों ही जिंदगी के पहलू हैं।
  • अपनी गलतियों से सीखें। नकारात्मक सोच का जरिया न बनाएं।
  • अपने शौक को जिंदगी का हिस्सा बनाएं। अपने भीतर के बच्चे को जिंदा रखें।
  • खुलकर हंसे, खुलकर मुस्कुराएं और अपनी बातों को शेयर करें।
  • अपनी क्षमता के हिसाब से करियर और रिश्तों का चुनाव करें।

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