महिला दिवस: पीएम मोदी ने छोड़ा अपना सोशल मीडिया अकाउंट, इन 7 महिलाओं को सौंपा ट्विटर, जानें इनकी प्रेरणादायक कहानी

narendra modi

चैतन्य भारत न्यूज

नई दिल्ली. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना सोशल मीडिया अकाउंट उन 7 महिलाओं को सौंप दिया है, जिनके जीवन की कहानी प्रेरणादायक है। जीवन में कोई खास मुकाम हासिल करने वाली ये सात महिलाएं आज पीएम मोदी के सोशल मीडिया अकाउंट्स से अपने जीवन के सफर को साझा कर रही हैं।



दरअसल पीएम मोदी ने रविवार सुबह एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने बताया था कि वह अपने सभी सोशल मीडिया एकाउंट्स से लॉग आउट हो रहे हैं और इसकी जिम्मेदारी ‘सात महिला अचीवर्स’ को दे रहे हैं। उन्होंने बताया था कि, ये सात महिलाएं अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अपने जीवन की जर्नी शेयर करेंगी। पीएम मोदी ने ट्वीट में यह भी लिखा था कि, ‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर बधाई! हम अपनी नारी शक्ति की भावना और उपलब्धियों को सलाम करते हैं। जैसा कि मैंने कुछ दिन पहले कहा था। मैं उनके लिए अपना सोशल मीडिया छोड़ रहा हूं। पूरे दिन मेरे सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए सात वुमन अचीवर्स अपने जीवन की जर्नी के बारे में शेयर करेंगी और शायद आपके साथ इंटरेक्ट करेंगी। ये वुमन अचीवर्स अपने विचार शेयर कर रही हैं।’

 

स्नेहा मोहन डोस

स्नेहा मोहन डोस ने बताया कि, ‘मैं वोलेंटीयर्स के साथ काम करती हूं। जिनमें से कई भारत के बाहर के हैं, भूखमरी मिटाने की दिशा में काम कर रहे हैं। हमारे पास 20 से ज्यादा चेप्टर्स हैं और हमने अपने काम से कई लोगों को प्रभावित किया है। हमने मास कुकिंग, कुकिंग मैराथन, ब्रेस्ट फीडिंग अवेयरनेस ड्राइव जैसी गतिविधियां भी शुरू कीं। जब मैं जो चाहती हूं और वह करती हूं तो इससे मैं खुद मजबूत महसूस करती हूं। मेरी इच्छा है कि अपने देशवासियों को प्रेरित करूं। खासकर उन्हें जो महिलाएं आगे आती हैं। मेरे साथ काम करने के लिए शामिल होती हैं। मैं हर किसी से निवेदन करती हूं कि कम से कम एक जरूरतमंद को खाना खिलाएं। हंगर फ्री प्लानेट के लिए योगदान दें।’

स्नेहा ने लिखा कि, ‘आपने फूड के विचार के बारे में सुना होगा। अब इसके लिए एक्शन का समय है। गरीबों के लिए बेहतर भविष्य है। हेलो मैं @snehamohandoss, मैंने मां से प्रेरित होकर, जिन्होंने बेघरों को खाना खिलाने की आदत डाली, मैंने फूड बैंक इंडिया नाम से यह पहल शुरू की। वह हमें प्रेरित करती है।’

स्नेहा मोहन ने आगे लिखा कि, ‘धन्यवाद, मैंने भूख को खत्म करने की आवश्यकता पर जागरूकता फैलाने के लिए पीएम के ट्विटर हैंडल का इस्तेमाल कर रही हूं। क्या आप और अन्य मेरी मदद करेंगे? यह आसान है। जरूरतमंदों को खाना खिलाएं, सुनिश्चित करें कि थोड़ा भी खाना बेकार न जाए। आपकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद। मैं आपसे भारत को भूख मुक्त बनाने के लिए अपने समुदाय में इसी तरह के कदम उठाने का आग्रह करूंगा। मैं महात्मा गांधी के कोट्स में विश्वास करती हूं। दुनिया हर किसी की जरूरत के लिए पर्याप्त है, लेकिन हर किसी के लालच के लिए नहीं।’

मालविका अय्यर

मालविका अय्यर ने लिखा कि, ‘मेरा मानना है कि परिवर्तन के लिए शिक्षा बहुत जरूरी है। हमें भेदभावपूर्ण रवैये के बारे में युवा माइंड को संवेदनशील बनाना होगा। हमें विकलांग लोगों को कमजोर और आश्रित दिखाने की बजाय रोल मॉडल के रूप में दिखाने की जरूरत है। मैं 13 साल की उम्र में एक भीषण बम विस्फोट में बच गई। इस हादसे में मेरे हाथ उड़ गए और मेरे पैरों को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। फिर भी, मैंने काम किया और अपनी पीएचडी पूरी की। छोड़ देना कोई विकल्प नहीं है। देना कभी नहीं एक विकल्प है। अपनी सीमाओं को भूल जाइए और विश्वास और आशा के साथ दुनिया में कदम रखिए।

उन्होंने आगे लिखा कि, ‘स्वीकृति सबसे बड़ा इनाम है जो हम खुद को दे सकते हैं। हम अपने जीवन को नियंत्रित नहीं कर सकते, लेकिन हम निश्चित रूप से जीवन के प्रति अपने दृष्टिकोण को नियंत्रित कर सकते हैं। अंत में, यह है कि हम अपनी चुनौतियों के बीच कैसे जीवन जिएं, जो सबसे ज्यादा मायने रखती है।’

मालविका ने कहा, ‘मनोवृत्ति विकलांगता को नष्ट करने की आधी लड़ाई है। यह तथ्य कि माननीय पीएम ने महिला दिवस पर मेरे विचारों को प्रसारित करने के लिए चुना है, मुझे विश्वास है कि विकलांगता के संबंध में भारत पुराने अंधविश्वासों को खत्म करने के लिए सही रास्ते पर है।’

आरिफा

कश्मीर की रहने वाली आरिफा का कहना है कि, ‘पीएम नरेंद्र मोदी के इस गेस्चर ने मेरा मनोबल बढ़ाया है और यह मुझे क्राफ्ट की बेहतरी के साथ-साथ पूरे कश्मीर के कारीगरों के लिए कड़ी मेहनत करने में मदद करेगा। मुझे लगता है कि अधिक से अधिक महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने पर ध्यान केंद्रित करना और अन्य महिलाओं की मदद करना महत्वपूर्ण है। जब परंपरा आधुनिकता से मिलती है, तो चमत्कार हो सकता है। मैंने अपने काम में इसका अनुभव किया। यह आधुनिक दिन के बाजार के अनुरूप बनाया गया है।’

उन्होंने कहा कि, ‘मेरी पहली बिजनेस एक्टिविटी नई दिल्ली में हस्तनिर्मित वस्तुओं की प्रदर्शनी में भाग ले रही थी। इस प्रदर्शन ने एक अच्छे ग्राहक और एक टर्नओवर को आकर्षित किया। मैंने हमेशा कश्मीर के पारंपरिक क्राफ्ट को पुनर्जीवित करने का सपना देखा क्योंकि यह स्थानीय महिलाओं को सशक्त बनाने का एक साधन है। मैंने महिला कारीगरों की स्थिति देखी और इसलिए मैंने नमदा क्राफ्ट को संशोधित करने के लिए काम करना शुरू किया। मैं कश्मीर से आरिफा हूं और यहां मेरी जीवन जर्नी है।’

कल्पना रमेश

कल्पना का कहना है कि,’ एक योद्धा बनिए लेकिन अलग तरह से। पानी के योद्धा बनिए। क्या आपने कभी भी पानी की कमी के बारे में सोचा है? हममें से हर कोई सामूहिक रूप से अपने बच्चों के लिए सुरक्षित पानी वाला भविष्य बनाने के लिए कार्य कर सकते हैं। मैं इस तरह अपनी कोशिश कर रही हूं।’

कल्पना ने अपनी कहानी बताते हुए कहा कि, ‘छोटी कोशिशें बहुत बड़ा असर डाल सकते हैं। पानी एक मूल्यवान चीज है जो हमें विरासत के तौर पर मिली है। हमारी आने वाली पीढ़ियों को इससे वंचित न होने दें। जिम्मेदारी से पानी का उपयोग, वर्षा जल का संचयन करें, झीलों को बचाएं, उपयोग किए गए पानी को रिसाइकल करें और जागरूकता पैदा करें। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं चिड़ियों को वापस किसी झील में ला सकती हूं या प्रधानमंत्री के अकाउंट से ट्वीट कर सकती हूं। दृढ़ संकल्प के साथ असंभव को प्राप्त किया जा सकता है। हम जल संसाधनों के प्रबंधन पर सामूहिक कार्रवाई के साथ समुदायों में बदलाव ला सकते हैं। आइये हम परेशानी को खत्म करने वाले बनें।’

ये भी पढ़े…

Womens Day: जानें कब और कैसे हुई अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरूआत, बेहद खास है इस साल की थीम

महिला दिवस: दूसरों के घरों में काम करने वाली महिला बन गई एक मशहूर लेखिका, संघर्ष की कहानी ने बनाया स्टार

महिला दिवस: इन 5 महिलाओं ने बदली भारतीय राजनीति की तस्वीर, नेतृत्व क्षमता को सभी हुए नतमस्तक

VIDEO: महिला दिवस पर गूगल ने बनाया खास डूडल ऐनिमेटेड वीडियो, दिखें महिलाओं के अनेक स्वरूप

Related posts